Sep 26, 2026 Login

एसआईआर पर चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण: मतभेद की खबरों को किया खारिज, कहा-सहमति से लिए गए सभी फैसले

Election Commission's major clarification on SIR: Dismisses reports of differences, states all decisions were taken by consensus.

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग के भीतर बड़े स्तर पर आंतरिक असहमति की खबरों के बीच शनिवार को भारत निर्वाचन आयोग की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की उपस्थिति में हुई इस बैठक के बाद आयोग ने एक विस्तृत प्रेस रिलीज जारी कर तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों के बीच शनिवार को आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मौजूदगी में निर्वाचन सदन में फुल कमीशन की बैठक हुई। बैठक के बाद जारी आयोग की प्रेस रिलीज में कहा गया कि देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले महीनों में एसआईआर, मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कई मौकों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग की शनिवार की सफाई ने इन रिपोर्टों के बीच SIR से जुड़े फैसलों पर सामूहिक मंजूरी की बात कही है। चुनाव आयोग के मुताबिक एसआईआर से संबंधित पहला आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था और इसकी शुरुआत बिहार से हुई। इसके बाद पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। आयोग ने कहा कि 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का कार्यक्रम सर्वसम्मति से जारी किया गया, जबकि 14 मई 2026 को 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कार्यक्रम जारी किया गया। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि एसआईआर शुरू करने के फैसले पर आपत्ति नहीं की जा सकती, जबकि चुनौती मुख्य रूप से इसकी प्रक्रिया और तौर-तरीकों से जुड़ी थी। एसआईआर को लेकर विवाद केवल राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। 25 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक विस्तृत रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ कदमों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटा के डिजिटल प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, शनिवार को चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान का केंद्र बिंदु यह रहा कि एसआईआर से जुड़े आदेश और कार्यक्रम आयोग की सामूहिक मंजूरी के बाद जारी किए गए। इससे विवाद के बीच आयोग ने अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति सार्वजनिक कर दी है। आयोग ने ईसीआईएनईटी जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें  आईआईटी/आईआईआईटी का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। यह समिति यह जांच करेगी कि सिस्टम कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। आयोग के मुताबिक, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं। भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई व्यवस्थाओं पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति में चर्चा की जाएगी। एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कुछ राज्यों में समयसीमा भी बढ़ाई गई है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक की गई है। महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 तथा निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। चुनाव आयोग के बयान के बाद भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधा। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आयोग की बैठक में तीनों सदस्य मौजूद थे और एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। दूसरी ओर, विपक्षी दल पहले सामने आई रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग से सवाल उठा चुके हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर पारदर्शिता पर स्पष्टीकरण की मांग की है। एसआईआर का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध मतदाता सूची से है। एक तरफ आयोग इसे मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसके तौर-तरीकों को लेकर राजनीतिक और संस्थागत सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में शनिवार की बैठक के बाद आया आयोग का बयान विवाद को समाप्त करता है या आगे और स्पष्टीकरण की जरूरत पैदा करता है, यह आने वाले दिनों की प्रक्रिया और आयोग की अगली कार्रवाइयों से स्पष्ट होगा।