बिहार के बाद असम सरकार का बड़ा फैसला: नीट आंदोलन के प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस, गिरफ्तार लोगों की होगी रिहाई
नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलन के बाद बिहार और असम सरकार ने प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। दोनों राज्यों ने आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इस फैसले को छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।
बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई शाम छह बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकी (एफआईआर), परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे। साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भविष्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उधर, असम सरकार ने भी आधिकारिक आदेश जारी कर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत देने का निर्णय लिया है। असम सरकार के अनुसार, इस आंदोलन के दौरान 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सरकारों के इस फैसले से पहले काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर चेतावनी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारियों और आयोजकों पर दर्ज आपराधिक मामले वापस नहीं लिए गए तो मंगलवार से देशव्यापी आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। संगठन ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर 36 दिन तक चले आंदोलन के समापन से पहले केंद्र सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में सभी मामलों को वापस लेने पर सहमति बनी थी। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक मसौदा समझौता सौंपा गया था। सरकार ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मंगलवार तक लिखित समझौता देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि यदि यह वादा पूरा नहीं हुआ तो संगठन दोबारा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा। इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में छात्रों पर दर्ज मामलों में उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की। सिब्बल ने आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) तकनीक के जरिए आंदोलनकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। गौरतलब है कि बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान कई जिलों में हिंसक घटनाएं हुई थीं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पूरे राज्य में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 339 नाबालिग शामिल थे। नाबालिगों को बाद में छोड़ दिया गया, जबकि 355 लोगों को अदालत में पेश किया गया। आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में 91 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। सारण में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि सिवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी भी जख्मी हुए थे। सरकारों के ताजा फैसले के बाद छात्र संगठनों में राहत का माहौल है। हालांकि सीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने तक पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला छात्र आंदोलन के दबाव और सरकार के साथ हुए संवाद का महत्वपूर्ण परिणाम है, जिसका असर आने वाले दिनों में अन्य राज्यों की नीतियों पर भी दिखाई दे सकता है।