Sep 30, 2026 Login

उत्तराखण्डः आर्मी की नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगारों से लाखों की ठगी! दो आरोपी गिरफ्तार, 46 अभ्यर्थियों के फर्जी जॉइनिंग लेटर मिले

Uttarakhand: Unemployed youths swindled out of lakhs with promises of Army jobs! Two accused arrested; fake joining letters for 46 candidates recovered.

चंपावत। सेना के मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का बनबसा पुलिस और एसओजी ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपित धीरज सक्सेना निवासी भजनपुर, बनबसा और उसके सहयोगी गणेश बहादुर निवासी धारचूला को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 46 फर्जी नियुक्ति पत्रों के अलावा एमईएस की फर्जी मोहर, स्टांप पैड, कूटरचित दस्तावेज, अभ्यर्थियों के फोटो, मेडिकल प्रमाण पत्र, दो मोबाइल फोन और एक स्कूटी बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कई बेरोजगारों को सेना के एमईएस में नौकरी लगाने का भरोसा देकर उनसे रकम ऐंठी थी। पुलिस के मुताबिक 28 सितंबर को मिलिट्री इंटेलिजेंस बनबसा और मुख्यालय लखनऊ से मिली सूचना के आधार पर टनकपुर निवासी गुरु शरण सिंह ने थाना बनबसा में धीरज सक्सेना और गणेश बहादुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार आरोपितों ने एमईएस में नौकरी दिलाने के नाम पर गुरु शरण से पांच हजार रुपये नकद लिए थे। इसके अलावा उससे 1.40 लाख रुपये यूपीआई के माध्यम से भी लिए गए थे। पुलिस के अनुसार 28 सितंबर को धीरज ने पीड़ित को नियुक्ति पत्र देने और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर कमल पथ आर्मी एरिया, बनबसा के पास बुलाया था। पीड़ित जब बताए गए स्थान पर पहुंचा तो वहां पहले से कई अन्य अभ्यर्थी भी मौजूद थे। पूछताछ में सामने आया कि कई अन्य लोगों से भी नौकरी के नाम पर रकम ली गई थी और उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बायोमेट्रिक के लिए बुलाया गया था। पुलिस के अनुसार, मौके पर सोनिया जोशी निवासी भूड़ महोलिया खटीमा, कविता जोशी निवासी राजेंद्र नगर, खटीमा, उमेश भारद्वाज निवासी जयपुर, राजस्थान और धारा सिंह बैरवा निवासी गंगानगर, राजस्थान समेत कई अन्य अभ्यर्थी भी पहुंचे थे। आरोप है कि इन लोगों से भी एमईएस में नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि ली गई थी। जब सभी अभ्यर्थी बताए गए स्थान पर पहुंच गए तो आरोपित धीरज सक्सेना अपने साथी गणेश बहादुर के साथ स्कूटी से मौके से निकल गया। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई और जांच शुरू की गई। मामला दर्ज होने के बाद थानाध्यक्ष बनबसा के नेतृत्व में थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने आरोपितों की तलाश शुरू की और देर रात मुख्य आरोपित धीरज सक्सेना को उसकी स्कूटी संख्या यूके07एसी-3133 के साथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने धीरज के कब्जे से 35 अभ्यर्थियों के जॉइनिंग लेटर, एमईएस की दो मोहर, स्टांप पैड, कूटरचित दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किए। इसके बाद उसके सहयोगी गणेश बहादुर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से 11 अभ्यर्थियों की फाइलों में रखे नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज, मेडिकल प्रमाण पत्र, मोबाइल फोन तथा फर्जी मोहर बरामद हुई।

मोबाइल में मिले लाखों के लेनदेन
पुलिस के अनुसार, आरोपित धीरज सक्सेना के मोबाइल फोन की जांच में लाखों रुपये के लेनदेन की पुष्टि हुई है। इससे पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से बेरोजगारों को सेना में नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम वसूल रहा था। पुलिस अब मोबाइल और बरामद दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने अभ्यर्थियों से रकम ली गई और ठगी की कुल धनराशि कितनी है। बरामद फर्जी नियुक्ति पत्रों और अन्य दस्तावेजों की जांच के जरिए गिरोह के नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली की जानकारी जुटाई जा रही है। संयुक्त टीम में एसआई विनय मित्तल, एसआई कमलेश भट्ट, एएसआई धीरेंद्र बिष्ट, हेड कांस्टेबल महेंद्र डंगवाल, कांस्टेबल रविंद्र वर्मन, ललित चौधरी, मदन सिंह और कुलदीप सिंह शामिल रहे।