यमुना की लहरों में समा गईं 10 जिंदगियां: वृंदावन में मौत बनकर दौड़ी मोटरबोट,पांटून पुल से टकराकर पलटी

10 Lives Swallowed by the Waves of the Yamuna: Motorboat Turns into a Harbinger of Death in Vrindavan; Capsizes After Colliding with Pontoon Bridge

वृंदावन। कान्हा की नगरी वृंदावन में शुक्रवार का दिन मातम में बदल गया। धर्मनगरी के केसीघाट और बंशीवट के बीच यमुना की लहरों पर सैर कर रहे श्रद्धालुओं के लिए एक मोटरबोट काल बन गई। बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के हटाई जा रही पांटून पुल की लोहे की पाइपों से टकराकर श्रद्धालुओं से भरी नाव बीच मझधार में पलट गई। इस हृदय विदारक हादसे में 6 महिलाओं सहित 10 श्रद्धालुओं की डूबने से मौत हो गई। बोट पर लुधियाना, हिसार और मुक्तसर के करीब 37 लोग सवार थे। 22 लोगों को गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद बचा लिया, जबकि अन्य की तलाश के लिए देर रात तक सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा।

हादसे में बचे चश्मदीदों की दास्तां सुनकर रूह कांप जाती है। घायल श्रद्धालुओं ने बताया कि जैसे ही नाविक पप्पू ने बोट को तेज दौड़ाना शुरू किया, उन्हें डर लगने लगा था। यमुना में बहाव और हवा का दबाव होने के कारण लोगों ने नाविक से चिल्लाकर कहा, "भैया, स्पीड कम कर लो, हमें डर लग रहा है। लेकिन चालक ने लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए जवाब दिया, "यह हमारा रोज का काम है, आप चुप बैठो। पुल के पास पानी कम था, जहाँ नाव एक बार रुकी। लोगों ने मिन्नतें की कि अब आगे मत ले जाओ, हमें वापस घाट पर छोड़ दो। लेकिन चालक ने फिर अनसुना किया और इंजन की रफ्तार बढ़ा दी। अचानक हवा के झोंके और तेज गति के कारण नाव सीधे पांटून पुल के लोहे के ढाँचे से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि नाव अनियंत्रित हो गई। जान बचाने के लिए लोग एक तरफ झुके और असंतुलित होकर नाव पूरी तरह पलट गई। पलक झपकते ही 37 लोग पानी में समा गए। इस बड़े हादसे के पीछे यमुना रिवर फ्रंट परियोजना की भारी लापरवाही सामने आई है। नियमानुसार, जब जेसीबी और बुलडोजर से भारी पीपों को खींचकर पांटून पुल हटाया जा रहा था, तब उस पूरे क्षेत्र को प्रतिबंधित (Restrict) किया जाना चाहिए था। मौके पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही कोई सुरक्षाकर्मी जो नावों को वहां जाने से रोकता। इसी खींचतान के बीच नाव पुल की चपेट में आ गई। अब प्रशासन पुल हटाने वाली टीम के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की तैयारी कर रहा है।

पंजाब के लुधियाना और हरियाणा के हिसार से दो बसों में सवार होकर आए 130 श्रद्धालुओं का दल बड़े उत्साह के साथ सुबह वृंदावन पहुंचा था। हादसे से कुछ घंटे पहले ही इन लोगों ने निधिवनराज मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन किए थे। भक्ति के भाव में डूबे ये श्रद्धालु दोपहर करीब 2:30 बजे केसी घाट पहुंचे। दो नावों में सवार होकर वे यमुना की सैर पर निकले थे, लेकिन एक नाव के लिए यह सफर अंतिम साबित हुआ। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय गोताखोरों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नदी में छलांग लगा दी। सूचना मिलते ही डीआईजी शैलेश पांडेय, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण मौके पर पहुंच गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना की टुकड़ी बुलाई गई। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू में बाधा आई, जिसे दूर करने के लिए हाई-टेक ड्रोन कैमरों और सर्च लाइटों का सहारा लिया गया। देर रात तक 10 शव निकाले जा चुके थे, जबकि नाविक पप्पू का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को 'हृदय विदारक' बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से दुख जताया। केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।