ये क्या: उद्घाटन के 13 दिन बाद धंसी सड़क! अब ‘फर्राटा पंखों’ से सुखाया जा रहा एक्सप्रेसवे! 4200 करोड़ की सड़क पर उठे सवाल, वीडियो देख बोले लोग- ये तकनीक इंडिया से बाहर नहीं जानी चाहिए

What is this? A road caved in just 13 days after inauguration! Now, the expressway is being dried using high-speed fans! Questions are being raised about the ₹4,200-crore road; after watching the vid

नई दिल्ली। करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत और साढ़े चार साल के लंबे इंतजार के बाद तैयार हुआ 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे इन दिनों अपनी रफ्तार से ज्यादा सड़क की हालत और मरम्मत के तरीके को लेकर चर्चा में है। 13 जुलाई को उद्घाटन के बाद महज कुछ ही दिनों में सड़क धंसने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इसी एक्सप्रेसवे पर मरम्मत के दौरान बरसाती पानी सुखाने के लिए लगाए गए बड़े-बड़े फर्राटा पंखों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जहां सियासत गरमाई है, वहीं लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं और निर्माण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर व्यंग्य भी कर रहे हैं। इसको लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी वीडियो पोस्ट की है और सरकार पर निशाना साधा है। खबरों के मुताबिक उद्घाटन के बाद 26 जुलाई को कोरारी के पास किलोमीटर संख्या 64 पर करीब 30 मीटर सड़क धंस गई। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आती रहीं। सात अगस्त तक करीब 24 दिनों में 15 स्थानों पर सड़क धंसने की बात सामने आई है। वहीं उन्नाव सीमा क्षेत्र में आने वाले करीब 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में लगभग 60 जगह पैच लगाए जाने की जानकारी है। कई स्थानों पर सड़क की स्थिति वाहन चालकों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन रही है। 

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और बेहतर निर्माण गुणवत्ता के दावों के साथ तैयार किया गया था। यह उम्मीद जताई गई थी कि नई तकनीक से बनी सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहेगी और करीब एक दशक तक गड्ढों जैसी समस्या नहीं आएगी। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने और जगह-जगह पैच लगाए जाने की खबरों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट नवंबर 2018 में तैयार हुई थी। मार्च 2019 में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने परियोजना का भूमिपूजन किया था, जबकि पांच जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया। एनएचएआई और निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक के बीच हुए अनुबंध के अनुसार परियोजना को करीब 30 माह में पूरा किया जाना था और नवंबर-दिसंबर 2025 तक इसे चालू किया जाना प्रस्तावित था। हालांकि लखनऊ के एलीवेटेड सेक्शन में निर्माण में देरी के कारण परियोजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो सकी। एक्सप्रेसवे को 11 जून 2026 को पूर्णता प्रमाणपत्र मिला और 13 जुलाई को इसका उद्घाटन किया गया। इसके अगले दिन से इस पर यातायात शुरू हुआ। 

इधर सड़क धंसने की घटनाओं के बाद एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम शुरू कराया गया। इसी दौरान हुई बारिश के बाद मरम्मत वाले हिस्से में पानी भर गया। सड़क की सतह को सूखा करने के लिए बड़े ब्लोअर और फर्राटा पंखों का इस्तेमाल किया गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में एक व्यक्ति यह बताते हुए नजर आता है कि सड़क की मरम्मत का काम कई दिनों से चल रहा है और बारिश का पानी सुखाने के लिए फर्राटा पंखे लगाए गए हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर जमकर प्रतिक्रियाएं दीं। एक्स पर एक यूजर ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर पेचवर्क के पास जमा बरसाती पानी को सुखाने के लिए कई पंखे लगाए गए हैं। पोस्ट के साथ व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल किया गया कि आखिर इस तकनीक से सड़क कितने समय में सूखेगी। हालांकि सड़क मरम्मत के दौरान ब्लोअर या पंखों का इस्तेमाल अपने आप में कोई नई तकनीक नहीं है। डामर या बिटुमिनस सामग्री से पैचवर्क करने से पहले सड़क की सतह का सूखा होना जरूरी माना जाता है। बारिश के बाद सतह पर मौजूद नमी को हटाने के लिए ब्लोअर जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

ऐसे में असली सवाल पंखे लगाने का नहीं, बल्कि यह है कि खुले एक्सप्रेसवे पर भारी मात्रा में जमा बरसाती पानी को इन उपकरणों से कितनी प्रभावी और कितनी जल्दी सुखाया जा सकता है। यही सवाल सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो पर यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने इसे ‘गजब की तकनीक’ बताया तो किसी ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इतनी गर्मी में बिना कूलर के पानी कैसे सूखेगा। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में कूलर लगाने की सलाह तक दे डाली। कुछ लोगों ने वीडियो पोस्ट करने वाले से इसे डिलीट करने की सलाह देते हुए कहा कि कहीं यह ‘गुप्त तकनीक’ देश से बाहर न चली जाए।