आतंकवादी कहां मिलेंगे... कांग्रेस के दफ्तर में! राज्यसभा में भाजपा सांसदों ने लगाए नारे, सांसद के बयान पर मचा सियासी बवाल, रिजिजू ने राहुल गांधी से की मुलाकात

Where will terrorists be found... in the Congress office! BJP MPs raised slogans in the Rajya Sabha; the MP's statement sparked a political uproar; Rijiju met Rahul Gandhi.

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब भाजपा के महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे के एक बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में कुछ समय तक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना रहा, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर संसद के सुचारु संचालन को लेकर सकारात्मक बातचीत होने की जानकारी दी। 
सदन में चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनिल बोंडे ने वर्ष 2014 से पहले के राजनीतिक माहौल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय लोग यह सवाल पूछते थे कि भ्रष्टाचारी, कोयला चोर और आतंकवादी कहां मिलेंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से कुछ सांसदों ने जवाब में नारे लगाए, ‘कांग्रेस के दफ्तर में।’ इसके बाद बोंडे ने अपने संबोधन में ‘देशद्रोही, सैन्य विरोधी और किसान विरोधी’ जैसे शब्दों का भी उल्लेख किया, जिस पर सत्ता पक्ष की ओर से फिर इसी प्रकार की नारेबाजी सुनाई दी। सदन में बढ़ते शोर-शराबे और नारेबाजी को देखते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने भाजपा सांसद को विषय पर केंद्रित रहने की सलाह देते हुए कहा कि केवल विषय से संबंधित बातें ही सदन की कार्यवाही का हिस्सा बनेंगी। इसके बाद उन्होंने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। भाजपा सांसद के बयान और नारेबाजी पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यदि भाजपा के आरोप सही हैं तो सरकार यह बताए कि वर्ष 2014 के बाद उसने कथित रूप से कांग्रेस कार्यालयों से कितने आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान केवल वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं और सरकार को तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहिए।
इसी बीच संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में सरकार की ओर से पहल भी देखने को मिली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद रिजिजू ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि सरकार विपक्ष के साथ संवाद बनाए रखने और संसद को सुचारु रूप से चलाने के पक्ष में है। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के साथ एक विशेष मुद्दे सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार चाहती है कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो और विधायी कार्य बिना किसी व्यवधान के आगे बढ़ें। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सदन के संचालन में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसद का बार-बार बाधित होना देश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी बाधित होती है।
गृह मंत्री अमित शाह की संसद में उपस्थिति को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर भी रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुसार जिस मंत्री का विधेयक चर्चा में होता है, वही संबंधित समय पर सदन में उपस्थित रहता है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री नियमित रूप से संसद में मौजूद रहते हैं और आवश्यक विधायी कार्यों में भाग लेते हैं। राज्यसभा में हुई नारेबाजी और उसके बाद दोनों पक्षों की तीखी प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर मानसून सत्र के दौरान जारी राजनीतिक टकराव को उजागर कर दिया है। हालांकि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की पहल से यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सकेगी और लंबित विधायी कार्यों पर चर्चा आगे बढ़ेगी।