पश्चिम बंगाल 2026:कैसे ढहा ममता बनर्जी का किला और क्यों भाजपा ने पहली बार रचा इतिहास!राहुल गांधी बने बीजेपी के प्रचारक? या हिंदू नैरेशन की रणनीति ने जिताया
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ने राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ ला दिया। करीब डेढ़ दशक तक अजेय दिखने वाला ममता बनर्जी का राजनीतिक किला इस बार ढह गया और बीजेपी ने पहली बार सत्ता हासिल कर ली। यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीतियों, नैरेटिव और विपक्षी समीकरणों के बिखराव की पूरी कहानी है।
तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन इस बार चौंकाने वाला रहा। कभी बेहद मजबूत दिखने वाली पार्टी महज 81 सीटों पर सिमट गई, जबकि ममता सरकार के करीब 20 मंत्री चुनाव हार गए। यह हार केवल सत्ता विरोधी लहर का परिणाम नहीं थी, बल्कि कई स्तरों पर हुई राजनीतिक चूकों का नतीजा भी थी।
इस चुनाव में एक दिलचस्प और विडंबनापूर्ण भूमिका राहुल गांधी की भी रही। चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी द्वारा ममता बनर्जी और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पर की गई तीखी टिप्पणियां विपक्ष के लिए ही भारी पड़ गईं। जिस एकजुटता की जरूरत भाजपा के खिलाफ थी, वही आपसी बयानबाजी में कमजोर पड़ती दिखी। यह स्थिति कुछ ऐसी रही जैसे “अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेना” जहां विरोधी को घेरने की कोशिश में खुद की जमीन खिसक गई।
राहुल गांधी ने भ्रष्टाचार और आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से जुड़े मामलों को लेकर ममता सरकार पर लगातार सवाल उठाए। ये बयान तेजी से फैलते गए और जनमत को प्रभावित करने लगे। विपक्षी वोटर असमंजस में पड़े और वोटों का बिखराव बढ़ा, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई पहले ही संकेत दे चुके थे कि यदि ममता सरकार कमजोर होती है, तो उसका लाभ कांग्रेस को नहीं बल्कि भाजपा को मिलेगा और चुनाव परिणामों ने इस आकलन को सही साबित किया।
हिंदू नैरेशन की राजनीति से मिला बीजेपी फायदा
बीजेपी ने ममता की हिंदू विरोधी राजनीति का भरपूर फायदा उठाते हुए हिंदुओं के पक्ष में ही रणनीति बनाई जिसकी काट न तो तृणमूल के पास थी न किसी दूसरे राजनीतिक दल के पास।
बंगाल में बीजेपी ने हिंदुत्व का वो रूप दिखाया जो उत्तर भारत से बिल्कुल अलग था । माछ भात खाते हुए, मां काली का नाम लेते हुए। असम में मुस्लिम वोट इस तरह बंटे कि विपक्ष का गणित ही बिगड़ गया। ममता बनर्जी ने कहा था कि बीजेपी की सरकार बनी, तो मछली, मांस और अंडा खाना बंद हो जाएगा। बीजेपी ‘माछे-भात बंगाली’ की पहचान को खत्म कर देगी। पलटवार में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने सार्वजनिक तौर पर भगवा पहने हुए मछली खाई,मछली के साथ प्रचार हुआ। शाह ने भी कहा कि माछ-भात खाने वाला ही बंगाल का सीएम होगा।
बीजेपी ने इस ‘जय श्रीराम’ के बजाय ‘जय मां काली’ का नारा लगाया। क्योंकि पिछले चुनाव में बीजेपी के ‘जय श्री राम’ के नारे को ‘जय मां काली’ से काउंटर किया था, जिसका उसे फायदा हुआ। बीजेपी ने इससे सीख ली।बीजेपी की स्ट्रैटजी साफ थी कि मुस्लिम वोट बांटकर विपक्ष को होने वाले फायदे को घटाया जाए। बीजेपी ने असम के मूल मुस्लिमों को भी अपने पाले में करने की कोशिश की।
एक और महत्वपूर्ण पहलू लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण पैदा हुआ असंतोष रहा। 2011 से लगातार शासन कर रही तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ स्वाभाविक नाराजगी देखने को मिली। इसे कम करने के लिए पार्टी ने कई उम्मीदवार बदले, लेकिन यह दांव असरदार साबित नहीं हुआ।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा भी इस चुनाव में चर्चा का केंद्र बना। बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटने के कारण कई सीटों पर परिणाम प्रभावित हुए। खासकर उन सीटों पर जहां जीत-हार का अंतर कम था, वहां इसका असर साफ दिखाई दिया और भाजपा को बढ़त मिली। यह मुद्दा आगे चलकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बहस को और तेज कर सकता है।
2026 का पश्चिम बंगाल चुनाव यह साफ करता है कि राजनीति में केवल जनाधार ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही रणनीति और एकजुटता भी बेहद जरूरी होती है। ममता बनर्जी की हार और भाजपा की जीत इस बात का प्रमाण है कि कोई भी राजनीतिक किला स्थायी नहीं होता और छोटी-छोटी चूकें बड़े सत्ता परिवर्तन की वजह बन जाती हैं।