उत्तराखण्डः विश्व प्रसिद्ध द्वितीय केदार मदमहेश्वर धाम में गूंजे वैदिक मंत्र! ओंकारेश्वर मंदिर से 19 मई को रवाना होगी उत्सव डोली, 21 मई को खुलेंगे कपाट
रुद्रप्रयाग। जिले के ऊखीमठ स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विश्व प्रसिद्ध द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट खुलने की पावन प्रक्रिया विधिवत शुरू हो गई है। वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों को गर्भगृह से सभा मंडप में विराजमान कराया गया। कपाटोद्घाटन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। बूढ़ा मदमहेश्वर की तलहटी में मखमली बुग्यालों के मध्य स्थित भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट खुलने से पूर्व ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। विद्वान आचार्यों और वेदपाठियों ने पंचांग पूजन के तहत देवी-देवताओं का आवाहन किया। रावल भीमाशंकर लिंग के नेतृत्व में प्रधान पुजारी बागेश लिंग और शिव लिंग ने चल विग्रह उत्सव मूर्तियों की पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती संपन्न कराई। इस दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर को नए अनाज का भोग अर्पित कर विश्व शांति, समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सभा मंडप में विराजमान उत्सव मूर्तियों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसी अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग ने आगामी छह माह के लिए मदमहेश्वर धाम में पूजा-अर्चना हेतु प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग का विधिवत वरण भी किया।धार्मिक परंपरा के अनुसार 19 मई को भगवान मदमहेश्वर की उत्सव डोली ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होगी। डगवाड़ी, ब्राह्मणखोली, मंगोलचारी, मनसूना और विभिन्न यात्रा पड़ावों से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती हुई डोली प्रथम रात्रि प्रवास के लिए रांसी पहुंचेगी। 20 मई को गौंडार और 21 मई को बनातोली, मैखम्भा व कूनचट्टी होते हुए मदमहेश्वर धाम पहुंचेगी, जहां भगवान मदमहेश्वर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।