नैनीताल की सड़कों से उठी जादू की चमक, 8 वर्षीय साहिल के हुनर पर फिदा हुए आनंद महिंद्रा

A magical sparkle emanates from the streets of Nainital; Anand Mahindra is impressed by the talent of 8-year-old Sahil.

नैनीताल। पर्यटन सीजन में नैनीताल की सड़कों पर रोजाना कई चेहरे दिखाई देते हैं। कोई गीत गाकर लोगों का मनोरंजन करता है, कोई चित्रकारी कर अपनी कला दिखाता है तो कोई करतब दिखाकर गुजारा करता है। लेकिन इन दिनों एक नन्हे स्ट्रीट मैजिशियन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। करीब 8 वर्षीय साहिल नाम का यह बच्चा नैनीताल की सड़कों पर हाथ की सफाई और जादुई करतब दिखाते हुए नजर आया। उसके जादू का अंदाज इतना शानदार है कि दर्शक उसकी हर ट्रिक पर हैरान रह जाते हैं। कभी वह सिक्का गायब कर देता है, तो कभी वही सिक्का अचानक किसी दर्शक की जेब, कान या जूते से निकालकर सबको चौंका देता है। उसकी उंगलियों की तेजी और आत्मविश्वास बड़े-बड़े कलाकारों को भी हैरत में डालने वाला है।

एक पर्यटक ने साहिल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचा और आखिरकार देश के प्रसिद्ध उद्योगपति Anand Mahindra की नजर भी इस पर पड़ गई। महिंद्रा ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि यह लड़का बेहद प्रतिभाशाली है। उन्होंने पूछा कि क्या वह अभी भी नैनीताल की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है और कहा कि वह न केवल उसकी पढ़ाई में मदद करना चाहते हैं, बल्कि जादू की कला में उसकी रुचि को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं। महिंद्रा ने यह भी कहा कि आखिर यह बच्चा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जादूगरों में से एक क्यों नहीं बन सकता। 

जानकारी के अनुसार साहिल का परिवार पीढ़ियों से जादू के प्रदर्शन से आजीविका चलाता रहा है। आर्थिक तंगी के कारण उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई, लेकिन कम उम्र में ही उसने अपने पिता से जादू की बारीकियां सीख लीं। हाल ही में वह अपने पिता के साथ नैनीताल पहुंचा था, जहां सड़क पर किए गए उसके प्रदर्शन ने उसकी जिंदगी बदल देने वाली पहचान दिला दी। भारत में स्ट्रीट मैजिक या सड़क पर जादू दिखाने की कोई आधिकारिक राष्ट्रीय गणना उपलब्ध नहीं है, लेकिन लोक कलाकारों और पारंपरिक मदारी समुदायों से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार देश में हजारों परिवार आज भी जादू, करतब और सड़क कला के जरिए आजीविका कमाते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की भी होती है जो पारिवारिक परंपरा के तहत कम उम्र से ही इस कला को सीखना शुरू कर देते हैं। हालांकि शिक्षा और बाल अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ने के बाद ऐसे बच्चों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है।

साहिल की कहानी केवल एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस छिपी हुई प्रतिभा की मिसाल है जो अक्सर सड़कों और भीड़ के बीच गुम हो जाती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नैनीताल की सड़क पर जादू दिखाने वाला यह नन्हा कलाकार आने वाले वर्षों में कितनी ऊंचाइयों तक पहुंचता है।