उत्तराखण्डः उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में हाईकोर्ट सख्त! सरकार का जवाबी हलफनामा निकला गलत, 10 सितंबर को होगी अहम सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में उपनल कर्मचारी संघ की अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय में आज उस जवाबी हलफनामे (Response Affidavit) को लेकर अहम सुनवाई हुई, जो कल दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि तीन दिन पहले मुख्य सचिव ने निर्देश दिए थे कि तीन दिन के भीतर कर्मचारियों से कॉन्ट्रैक्ट साइन कराए जाएं, अन्यथा संबंधित विभाग के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आरोप लगाया गया कि इसी आदेश की आड़ में कर्मचारियों पर दबाव बनाकर कॉन्ट्रैक्ट साइन कराए जा रहे हैं। इस पर अदालत के संज्ञान लेने के बाद स्वयं Solicitor General ने स्वीकार किया कि दाखिल किया गया हलफनामा सही नहीं है और सरकार संशोधित एवं सही हलफनामा दाखिल करेगी। उन्होंने कोर्ट से नया शपथ पत्र दायर करने के लिए समय की मांग की। जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 10 सितंबर तय की है। 10 सितंबर को सचिव कार्मिक व सतर्कता शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव सैनिक कल्याण बोर्ड युगल पंत को पेश होना होगा। बता दें कि 1 वर्ष से प्रदेश सरकार द्वारा कोर्ट के आदेश का पालन न कर बार-बार अतिरिक्त समय की मांग की जा रही है, जिसे लेकर प्रदेश भर के उपनल कर्मियों में आक्रोश है। इस मामले में उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर कहा गया है कि 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में नियमितीकरण का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था। जब हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई तो सरकार पिछले 1 साल से इसको लटकाती रही है। जिसके चलते अब तक 22 हजार कर्मचारियों के नियमितिकरण पर निर्णय नहीं हो सका है।