उत्तराखण्डः 15 साल से कार्यरत उपनल कर्मचारी का वेतन घटाकर बनाया रिसेप्शनिस्ट! हाईकोर्ट ने विभाग के आदेश पर लगाई तत्काल रोक, 22 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारी अमर सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके वेतन में कटौती करने तथा पद घटाने से संबंधित विभाग के 02 सितंबर 2026 के विवादित आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना किसी भी कर्मचारी का वेतन घटाने अथवा पद अवनत (डिमोशन) करने जैसा प्रतिकूल आदेश जारी नहीं किया जा सकता। मामले के अनुसार, अमर सिंह वर्ष 2011 से संविदा के आधार पर उत्तराखण्ड निवास दिल्ली में सहायक प्रोटोकॉल के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें 42,618 रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा था। शासन ने 02 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर उनका वेतन घटाकर 34,720 रुपये कर दिया और पद भी घटाकर रिसेप्शनिस्ट कर दिया। इसके अलावा, उपनल के माध्यम से कर्मचारियों को उनके वास्तविक पद के अनुरूप वेतनमान देने के बजाय निम्नतर पे-लेवल (कम वेतनमान) निर्धारित कर अनुबंध कराने का मामला भी सामने आया, जिस व्यवस्था पर भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ललित सामंत ने प्रभावी पैरवी करते हुए कोर्ट में तर्क दिया कि विवादित आदेश जारी करने से पहले कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता ललित सामंत के तर्कों को स्वीकार करते हुए 2 सितम्बर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी तथा उत्तरदाताओं को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर 2026 को तय की गई है।