CJP Protest: पुलिस का बड़ा एक्शन! 150 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका भी डिटेन! राहुल गांधी का पोस्ट- ज्ञानेश जाएंगे
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजधानी दिल्ली में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच दिल्ली पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है और करीब 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। यूट्यूबर ध्रुव राठी और CJP की लीगल हेड रत्ना को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके भी दिल्ली पहुंच गए हैं। इस बीच अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी डिटेन कर लिया गया है। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती के साथ ही प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग, वाहनों की जांच और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर, मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर किए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और SIR प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी राजधानी पहुंचने और जंतर-मंतर तक जाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है और निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने के बीच पुलिस की कार्रवाई तेज होने की खबर है। प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा करने वाले यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया है। CJP की लीगल हेड रत्ना को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब तक करीब 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की अंतिम संख्या और उनके खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। दिल्ली पुलिस ने एक दिन पहले बयान जारी कर कहा था कि CJP की ओर से प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को प्राप्त हुआ, जबकि कार्यक्रम 10 अक्टूबर को प्रस्तावित था। पुलिस के मुताबिक, आवेदन निर्धारित समयसीमा के भीतर नहीं दिया गया। इसके अलावा पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान नियमों और निर्धारित शर्तों के कथित उल्लंघन का भी हवाला दिया था। पुलिस ने यह भी बताया था कि नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। ऐसे में प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना उसकी प्राथमिकता है।
ITO पर भीषण जाम, मंडी हाउस से जंतर-मंतर जाने वाले रास्ते बंद
प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। ITO और मंडी हाउस के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है। प्रमुख मार्गों पर वाहनों की सघन जांच की जा रही है और जांच के बाद ही लोगों को आगे जाने दिया जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों को भी प्रवेश के दौरान पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा जा रहा है। बैरिकेडिंग और वाहनों की जांच के कारण ITO इलाके में लंबी कतारें लगने और भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। मंडी हाउस से जंतर-मंतर की ओर जाने वाले मार्गों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके चलते आम यात्रियों और कार्यालय जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठा सवाल
CJP के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने की जानकारी दी थी। ये प्रतिबंध शुक्रवार से लागू हैं और शनिवार शाम छह बजे तक प्रभावी रहने की बात कही गई है। इसके अलावा मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी है। सुरक्षा व्यवस्था के चलते रेल सेवाओं और सड़क यातायात पर भी असर पड़ा है। हालांकि, मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के फैसले पर अब कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद DMRC ने कई स्टेशनों के गेट बंद रखे। दरअसल, 9 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया था कि सेवाओं का संचालन नियंत्रित तरीके से किया जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो। अब मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
15 जिलों में दो दिन तक छापेमारी, सैकड़ों लोगों पर कार्रवाई
CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने राजधानी के 15 जिलों में लगातार दो दिनों तक छापेमारी और जांच अभियान चलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने के संदेह वाले कई लोगों को पकड़ा गया। कुछ लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ को उनके घरों में नजरबंद रखे जाने की जानकारी है। पुलिस को आशंका थी कि पूर्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान हंगामे से जुड़े कुछ लोग इस बार भी कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई। हालांकि, इस अभियान में कुल कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया और कितनों को एहतियातन हिरासत में रखा गया, इसका विस्तृत आंकड़ा सामने नहीं आया है।
नितिन नवीन का राहुल गांधी और CJP पर हमला
CJP के प्रदर्शन के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्षी इंडिया गठबंधन और CJP पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है और इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का दावा किया। नितिन नवीन ने राहुल गांधी और CJP पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में 140 करोड़ लोग शांति और सद्भाव के साथ रह रहे हैं तथा भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं। उनके मुताबिक, देश को अस्थिर करने के प्रयासों का कड़ाई से जवाब दिया जाएगा और ऐसी कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। ये आरोप भाजपा अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं; इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण सामने आना बाकी है।
राहुल गांधी की पोस्ट से भी सियासी हलचल
दूसरी ओर, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से जाएंगे और उनकी सरकार आएगी। CJP का प्रदर्शन SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर विरोध के बीच आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवाल शामिल हैं।