उत्तराखण्डः 12 वर्षों बाद होने वाली नंदा राजजात यात्रा फिलहाल स्थगित! समिति ने लिया औपचारिक निर्णय, जानें क्या बताई वजह?

 Uttarakhand: The Nanda Raj Jat Yatra, scheduled to take place after 12 years, has been postponed for now! The committee has taken a formal decision. What is the reason?

देहरादून। नंदा देवी राजजात यात्रा से जुड़ा एक बड़ा अपड़ेट सामने आया है। श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने 12 वर्षों बाद होने वाली यात्रा को इस वर्ष फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। अब यह यात्रा अगले साल 2027 में आयोजित होगी। समिति के मुताबिक यात्रा को उसके परंपरागत 12 वर्षीय चक्र के अनुरूप 2027 में ही संपन्न कराया जाएगा। समिति का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सितंबर माह के दौरान हिमस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम अधिक रहता है। पूर्व में इसी अवधि में कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन्हीं सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए यात्रा की तिथि आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यात्रा की औपचारिक शुरुआत से जुड़ी मनौती आगामी वसंत पंचमी पर की जाएगी, जिसके बाद यात्रा की सटीक तिथियों पर अंतिम मुहर लगेगी। समिति ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय धार्मिक परंपराओं, पंचांग की गणना, प्रशासनिक तैयारियों और यात्रा की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव मिल सके। इस दौरान समिति ने सरकार से मांग की है कि नंदा राजजात के लिए कुंभ मेले की तर्ज पर एक अलग प्राधिकरण का गठन किया जाए। साथ ही यात्रा के सफल आयोजन हेतु करीब 5,000 करोड़ रुपये के बजट की भी मांग रखी गई है। बता दें कि नंदा राजजात केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना और लोकआस्था की आत्मा मानी जाती है। इसे हिमालय की सबसे लंबी और चुनौतीपूर्ण पैदल धार्मिक यात्राओं में शामिल किया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार यह यात्रा मां नंदा देवी को उनके मायके गढ़वाल से ससुराल होमकुंड तक विदा करने की प्रतीक है। मां नंदा देवी को भगवान शिव की अर्धांगिनी और हिमालय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।