उत्तराखण्डः अभियोजन निदेशक की नियुक्ति पर बड़ा सवाल! पुलिस अधिकारी की तैनाती को चुनौती, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब

Uttarakhand: The appointment of the Director of Prosecution is a major question! The High Court challenges the appointment of a police officer and asks the state government to respond within four wee

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अभियोजन निदेशक के पद को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने इस पर चार सप्ताह में राज्य सरकार से जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। मामले के अनुसार केशर सिंह चौहान ने याचिका दायर कर अभियोजन निदेशक के पद पर हुई पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि राज्य को बने 26 साल होने को हैं, लेकिन अभी तक अभियोजन निदेशक के पद पर पुलिस अधिकारियों की ही नियुक्ती होती आई है। जो कि भारतीय न्याय सहिंता की धारा 20 का उल्लंघन है। न्याय सहिंता की धारा में प्रावधान है कि अभियोजन निदेशक के पद पर सेवानिवृत्त सेशन जज या ऐसे अधिवक्ता जिनकी वकालत 15 साल हो चुकी हो उन्हें अभियोजन निदेशक के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। लेकिन अभी तक इस पद पर पुलिस अधिकारी की ही नियुक्ति करना सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लंघन है। याचिका में यह भी कहा गया कि जांच स्वतंत्र हो, इसलिए इस विभाग को पुलिस से अलग रखा गया है। अब यहां पुलिस अधिकारी ही पद को संभाले हुए है तो जांच प्रभावित हो सकती है। उनके द्वारा अपनी याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि अभियोजन निदेशक के पद पर सेवानिवृत्त सेशन जज या ऐसे अधिवक्ता की नियुक्ति की जाए, जिसकी वकालत 15 साल की हो चुकी हो और वह भारतीय न्याय सहिंता की धारा 20 में दिये गए प्रावधानों को पूर्ण करता हो।