बैलपड़ाव लाइनमैन हत्याकांड:3 करोड़ की तार चोरी की दलील नहीं आई काम, एससी-एसटी एक्ट और हत्या के आरोपी जेई और लाइनमैन की जमानत खारिज
नैनीताल: बैलपड़ाव के संविदा लाइनमैन देवेन्द्र कुमार की मौत के बहुचर्चित मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशान्त जोशी ने आरोपी जेई होशियार सिंह भण्डारी और विशाल सैनी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।
जमानत सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि बिजली विभाग का करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य का विद्युत तार चोरी हो गया था। इसी मामले में संदेह के आधार पर संविदा लाइनमैन देवेन्द्र कुमार से पूछताछ के लिए उन्हें साथ ले जाया गया था।
इस पर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने कोर्ट में कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि वास्तव में विभाग का करोड़ों रुपये का तार चोरी हुआ था, तो उसकी एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई? यदि मामला चोरी का था तो विधिक प्रक्रिया अपनाने के बजाय मृतक के घर जाकर उसकी मां के साथ अभद्र व्यवहार क्यों किया गया? अभियोजन के अनुसार, मृतक के परिवार की शिकायत में यह भी आरोप है कि आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए धमकी दी कि "शाम को देख लेंगे।"
अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी मृतक को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद उसे बैलपड़ाव ले जाया गया, जहां उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसने उल्टियां कीं। अभियोजन के अनुसार, इसके बाद आरोपी ही उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शासकीय अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि देवेन्द्र कुमार आरोपियों के साथ जीवित गया था और उसकी मृत्यु उनकी कस्टडी के दौरान हुई। अभियोजन के अनुसार, घटना के बाद आरोपियों ने न तो तत्काल पुलिस को सूचना दी और न ही विभागीय अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। वहीं, जांच के दौरान उल्टी के नमूने भी परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है।
अभियोजन ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और घटनाक्रम आरोपियों के खिलाफ गंभीर परिस्थितियां दर्शाते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशान्त जोशी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी होशियार सिंह भण्डारी और विशाल सैनी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
बता दें कि यह मामला हत्या, अपहरण और एससी-एसटी एक्ट से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले में अधिवक्ता प्रदीप परगाई भी पैरवी कर रहे हैं।