उत्तराखण्डः नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग की कवायद पर भड़के राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता! बोले- यहां से हाईकोर्ट हटाना पहाड़ के हितों के खिलाफ
नैनीताल। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ की ओर से हाईकोर्ट बार सभागार में उत्तराखंड राज्य की आधारभूत समस्याओं को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बावजूद पहाड़ की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होने पर चिंता जताई गई। वहीं नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट करने की कवायद को लेकर भी अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि जिस मूल अवधारणा के साथ अलग उत्तराखंड राज्य की मांग की गई थी, राज्य गठन के 25 साल बाद भी उस उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सका है। पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि अलग उत्तराखंड राज्य की मांग के आंदोलन में नैनीताल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आंदोलन के दौरान 42 दिनों तक धरना और प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद नैनीताल में उत्तराखंड हाईकोर्ट की स्थापना को पहाड़ के लोगों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा और अन्य दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले लोगों को नैनीताल में न्याय की सुविधा अपेक्षाकृत आसानी से मिलती है। ऐसे में हाईकोर्ट को तराई क्षेत्र में शिफ्ट करने की कवायद को उन्होंने पहाड़ के हितों के खिलाफ बताया। हाईकोर्ट शिफ्टिंग के पीछे यातायात संबंधी समस्याओं को आधार बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि यातायात की समस्या है तो उसका समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए, न कि न्याय की महत्वपूर्ण संस्था को ही पहाड़ से बाहर ले जाया जाए। गोष्ठी में राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के मौजूदा ढांचे और उस पर खर्च होने वाली बड़ी धनराशि को भी चर्चा का विषय बनाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के लिए आर्थिक संकट का सामना कर रही है, ऐसे में पहले से संचालित हाईकोर्ट को शिफ्ट करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।