उत्तराखण्डः रोडवेज कर्मचारी संघ के मामले में हाईकोर्ट सख्त! ट्रेड यूनियन के कामकाज में अधिकारियों की दखलंदाजी पर उठाए सवाल

Uttarakhand: High Court takes a tough stance on the Roadways Employees' Union issue; questions official interference in the trade union's functioning.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के परिवहन निगम में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा ट्रेड यूनियन बनाये जाने के मामले में, परिवहन निगम के  बड़े अधिकारियों द्वारा उसमें हस्तक्षेप कर यूनियन के लीडरों को इसमें हस्तेक्षप न करने को लेकर दायर संघ की याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने लेबर कमिश्नर व उसके रजिस्ट्रार से कहा है कि इस संबंध में वे निगम के नेताओं और निगम के अधिकारियों से वार्ता करें। यह भी देखें कि किस आधार पर ट्रेड यूनियन में ये अधिकारी दखलांजगी कर सकते हैं। क्योंकि ट्रेड यूनियन में दखलांजगी केवल लेबर कमिश्नर या उसका रजिस्ट्रार ही कर सकता है। अधिकारी नही, जो कि नियमों के खिलाफ है। इस मामले पर लेबर कमीशन व उसका रजिस्ट्रार दस सप्ताह के भीतर दोनों पक्षों को सुनके विधि अनुसार निर्णय लें। मामले के अनुसार रोडवेज कर्मचारी संघ की तरफ से उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा गया है कि वे ट्रेड नियम नियमावली के तहत रजिटर्ड हैं। नियमावली के सेवा शर्तो के मुताबिक कोई भी निगम का कर्मचारी संघ की सदस्यता ले सकता है। अगर वह संघ के नियमों का पालन नही करता है तो उसकी सदस्यता संघ ही निरस्त कर सकती है। लेकिन वर्तमान में निगम के सचिव सहित अन्य अधिकारी उनकी यूनियन में हस्तक्षेप कर यूनियन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं। संघ की याचिका में कहा गया है कि यूनियन के मामले में निगम के अधीकारी हस्तेक्षप न करें। हस्तक्षेप करने का अधिकार श्रम न्यायालय व उसके रजिस्ट्रार को है न कि निगम के अधिकारियों को।