उत्तराखण्डः एलीफैंट रिजर्व डिनोटिफिकेशन पर हाईकोर्ट सख्त! जानें क्या है पूरा मामला?
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा एलीफैंट रिजर्व को डिनोटिफाइ करने सम्बंधी दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के एलिफेंड कोरिडोर से जुड़े निर्णय को उत्तराखंड के सभी हाथी गलियारों पर लागू करते हुए याचिकाकर्ता को अपना पक्ष उच्चतम न्यायालय में रखने को कहा है। ऋषिकेश और भानियावाला के बीच फोर-लेन हाईवे के लिए 4400 पेड़ों के कटान के संबंध में उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय सर्वोच्च न्यायालय की उस पीठ द्वारा किया जाए, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश कर रहे हैं और जो उत्तराखंड में हरित आवरण के अतिक्रमण के मामले की सुनवाई कर रही है। उच्च न्यायालय ने न तो स्पष्ट रूप से और न ही परोक्ष रूप से अपने पहले के स्थगन आदेश को हटाया है और न ही एनएचएआई को पेड़ों की कटाई शुरू करने की अनुमति दी गई है। मार्च 2025 से हाथी गलियारों के माध्यम से सड़क विस्तार की इस परियोजना पर उच्च न्यायालय की रोक के कारण काम थमा हुआ है। बता दें कि देहरादून निवासी रेनू पाल ने सरकार के एलीफैंट रिजर्व को डिनोटिफाइ करने के अध्यादेश को चुनौती देते हुए कहा है कि उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड ने 24 नवंबर 2020 को शासनादेश जारी कर शिवालिक एलीफैंट रिजर्व को डिनोटिफाइ करने लेना दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण है। याचिकाकर्ता का कहना है प्रोजेक्ट एलीफैंट रिजर्व भारत सरकार द्वारा 1993 में 11 एलीफैंट रिजर्व फॉरेस्ट देश भर में नोटिफाई किए गए हैं। जिसमें से एक उत्तराखंड का शिवालिक एलीफैंट रिजर्व फॉरेस्ट है। उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य है जो कि अपने एलीफैंट रिजर्व फॉरेस्ट को डिनोटिफाइ करने जा रहा है।