Oct 10, 2026 Login
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उत्तराखंड हाईकोर्ट : याचिकाकर्ता ही सुरक्षित नहीं! भूमि अतिक्रमणकारियों ने याचिका वापस लेने के लिए दी धमकियां, हाईकोर्ट ने एसएसपी को दिए सुरक्षा मुहैया कराने और जांच के निर्देश

Uttarakhand High Court: Only the petitioner is not safe! The land encroachers threatened to withdraw the petition, the High Court gave instructions to the SSP to provide security and investigate

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के बनफूलपुरा में रेलवे की भूमि पर काबिज अतिक्रमण मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। आज हुई मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रवि शंकर जोशी ने रेलवे भूमि अतिक्रमणकारियों द्वारा याचिका वापस लेने और कुछ संगठनों द्वारा घर पर धरना प्रदर्शन करने की धमकियां मिलने के बाद सुरक्षा मुहैया कराने को कहा,जिसपर कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही एसएसपी को निर्देश देते हुए मामले की जांच कर 2 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा है।


मामले के अनुसार  9 नवम्बर 2016 को हाईकोर्ट ने रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते  हुए 10 हफ्तों के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी है उनको रेलवे पीपीएक्ट के तहत नोटिस देकर जनसुंवाईयाँ करें। रेलवे की तरफ से कहा गया कि हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है जिनमे करीब 4365 लोग मौजूद है। हाई कोर्ट के आदेश पर इन लोगो को पीपीएक्ट में नोटिस दिया गया। जिनकी रेलवे ने पूरी सुनवाई कर ली है। किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नही पाए गए। इनको हटाने के लिए रेलवे ने जिला अधिकारी नैनीताल से दो बार शुरक्षा दिलाए जाने हेतु पत्र दिया गया जिसपर आज की तिथि तक कोई प्रतिउत्तर नही दिया गया। जबकि दिसम्बर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यो को दिशा निर्देश दिए थे कि अगर रेलवे की  भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो   पटरी के आसपास रहने वाले लोगो को दो सप्ताह और उसके बाहर रहने वाले लोगो को 6 सप्ताह के भीतर नोटिस देकर हटाएं ताकि रेवले का विस्तार हो सके।