उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसलाः मृत आश्रित नियुक्ति मामले में सरकार की विशेष अपील खारिज! खंडपीठ बोली- एकलपीठ का आदेश सही
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मृत आश्रित कोटे से सीजनल अमीन के पुत्र को सरकारी विभाग में नौकरी दिलाये जाने के खिलाफ दायर सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने सरकार की विशेष अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एकलपीठ का आदेश सही था। इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नही है। क्योंकि यह कानून का दुरुपयोग है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि मृतक के पुत्र को उसकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार इस विभाग में नौकरी दी जाए। इस आदेश के खिलाफ सरकार ने डेढ़ साल बाद विशेष अपील दायर की। जिसे खण्डपीठ ने खारिज कर दिया है। मामले के अनुसार वर्ष 1998 में सीजनल कलेक्शन अमीन भगवान सिंह बिष्ट एवं अन्य कर्मचारियों द्वारा एक रिट याचिका उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर की गयी थी। उच्च न्यायालय ने उसे स्वीकार करते हुए उनके विनियमितीकरण के आदेश दिए थे। इस आदेश को राज्य सरकार की ओर से विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी गई थी, लेकिन वर्ष 2009 में सरकार की विशेष अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद सीजनल कलेक्शन अमीनो की विनियमितीकरण की प्रक्रिया आगे प्रारम्भ हो गयी।
हालांकि विनियमितीकरण आदेश जारी होने से पूर्व भगवान सिंह बिष्ट का निधन हो गया। इसके बाद उनके पुत्र घनश्याम सिंह ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करते हुए मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की। याचिका में उन्होंने स्वयं को स्नातकोत्तर शिक्षित बताते हुए अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नियुक्ति दिए जाने की प्रार्थना की। यह भी कहा कि उनके पिता सीजनल कलेक्शन अमीन जिला कार्यालय नैनीताल में कार्यरत थे। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने घनश्याम सिंह की याचिका स्वीकार कर राज्य सरकार को उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नियुक्ति देने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ के इस आदेश को राज्य सरकार की ओर से विलंब के साथ विशेष अपील दाखिल कर चुनौती दी गई। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार से कहा कि यह अपील उचित प्रतीत नहीं होती और एकलपीठ का आदेश सही है। इस पर राज्य सरकार की ओर से समय मांगा गया था। बताया गया कि जिलाधिकारी नैनीताल ने इस विशेष अपील को वापस लेने के निर्देश भी जारी किए थे। हालांकि सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में एकलपीठ के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। अंततः न्यायालय ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और विशेष अपील को निरस्त कर दिया।