रुद्रपुर:नावेल्टी स्वीट्स के प्लॉट पर भाई-भाई का विवाद,कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर 15 दिन की जेल की सजा! लिंक में पढ़ें कोर्ट ने किसे माना दोषी

Rudrapur: Brothers dispute over Novelty Sweets' plot, sentenced to 15 days in jail for disobeying court orders! Read the link to find out who the court found guilty.

रुद्रपुर। रुद्रपुर के मेन मार्केट स्थित एक बेशकीमती संपत्ति से जुड़े विवाद में चौथे अपर सिविल जज रविंद्र देव मिश्रा की कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा के आदेश का उल्लंघन करने के मामले में श्यामलाल नागपाल को दोषी पाते हुए 15 दिन के सिविल कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 31 जुलाई 2026 को सुनाया गया।
मामला मेन मार्केट स्थित प्लॉट संख्या जे-27 सीए और वहां संचालित रहे नोवेल्टी स्वीट्स एंड फास्टफूड से जुड़ा है। वादी रमेशलाल नागपाल ने अपने सगे भाई श्यामलाल नागपाल समेत अन्य के खिलाफ आदेश की अवमानना का मामला दायर किया था। आरोप था कि दीवानी वाद संख्या 179/2014 में सिविल जज जूनियर डिवीजन, रुद्रपुर की ओर से 15 दिसंबर 2014 को पारित अंतरिम निषेधाज्ञा के बावजूद विवादित संपत्ति का पारिवारिक बंटवारा और फ्रीहोल्ड कराया गया।
1975 में दोनों भाइयों ने मिलकर खरीदा था प्लॉट
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार रमेशलाल और श्यामलाल नागपाल ने वर्ष 1975 में संयुक्त रूप से उक्त प्लॉट खरीदा था। बाद में दोनों ने वहां नोवेल्टी स्वीट्स एंड फास्टफूड के नाम से कारोबार शुरू किया। संपत्ति को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब श्यामलाल की ओर से उसे बेचने का प्रयास किया गया। इसके बाद रमेशलाल ने संपत्ति के बंटवारे और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया।

वादी रमेशलाल नागपाल की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता गुरबाज सिंह एवं सुरेंद्र नरूला ने की। दोनों अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष अंतरिम निषेधाज्ञा के बावजूद विवादित संपत्ति के हस्तांतरण को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए श्यामलाल नागपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।


बता दें कि मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 15 दिसंबर 2014 को दोनों पक्षों को विवादित संपत्ति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया था। वादी रमेशलाल नागपाल का आरोप था कि न्यायालय के आदेश के बावजूद श्यामलाल नागपाल ने 12 मार्च 2015 को विवादित संपत्ति का पारिवारिक बंटवारा करा दिया। इसके बाद 10 अप्रैल 2015 को संपत्ति को अपने बेटे संजीव कुमार और बहू अंजलि के नाम फ्रीहोल्ड करा दिया गया। वादी ने इसे कोर्ट के अंतरिम आदेश का जानबूझकर उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि श्यामलाल नागपाल द्वारा अंतरिम निषेधाज्ञा के आदेश का उल्लंघन किया गया है। कोर्ट ने आदेश 39 नियम 2-ए सीपीसी के तहत उन्हें अवमानना का दोषी माना। हालांकि, कोर्ट ने श्यामलाल के बेटे संजीव नागपाल, बहू अंजलि नागपाल और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना का आरोप सिद्ध नहीं पाया।

 


15 दिन का सिविल कारावास, फिलहाल कुर्की नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में श्यामलाल नागपाल को 15 दिन के सिविल कारावास से दंडित करने का आदेश दिया। वहीं, संपत्ति की कुर्की के संबंध में आवश्यक विवरण दाखिल नहीं होने के कारण फिलहाल कुर्की का आदेश पारित नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि श्यामलाल नागपाल को इस फैसले के खिलाफ सक्षम अपीलीय न्यायालय में अपील करने का अधिकार है। फैसले के बाद मामले की पत्रावली नियमानुसार दाखिल दफ्तर कर दी गई है।