उत्तराखंड के हल्द्वानी में ऊर्जा निगम की घोर लापरवाही! पोल में दौड़ रहे करंट से पिता-बेटी की दर्दनाक मौत,उजड़ा परिवार
हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में ऊर्जा निगम की कथित घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता के कारण एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया। बिजली के पोल में सुबह से दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से सोमवार रात पिता-पुत्री की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान नदीम सलमानी और उनकी मासूम बेटी अलिज्बा के रूप में हुई है। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे बनभूलपुरा से लेकर मोर्चरी तक स्थानीय निवासियों में ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।
बनभूलपुरा क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से पिता-पुत्री की मौत के बाद ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस बिजली पोल में सोमवार सुबह से करंट दौड़ रहा था, उसकी शिकायत समय रहते ऊर्जा निगम से की गई थी। पोल से पहले गाय और फिर एक बुजुर्ग को करंट का झटका भी लगा, लेकिन कथित तौर पर फाल्ट दूर नहीं किया जा सका। रात में एसी की आउटडोर यूनिट ठीक करते समय करंट की चपेट में आए नदीम सलमानी को बचाने पहुंची उनकी बेटी अलिज्बा भी हादसे का शिकार हो गईं। दोनों की मौत से परिवार में मातम पसरा है। हादसे के बाद मंगलवार को बनभूलपुरा से लेकर मोर्चरी तक लोगों में ऊर्जा निगम के खिलाफ आक्रोश नजर आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि सोमवार सुबह नदीम के घर के बाहर लगे पोल में करंट महसूस किया गया था। इसी दौरान एक गाय पोल की चपेट में आ गई। आसपास मौजूद लोगों ने डंडे की मदद से उसे किसी तरह बचाया। इसके बाद शाम को इसी पोल के पास किराये की दुकान चलाने वाले अजीम को भी करंट का झटका लगा। लोगों के अनुसार, ऊर्जा निगम को दोपहर में ही इसकी सूचना दी गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत मिलने पर ऊर्जा निगम का एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा, लेकिन फाल्ट का पता नहीं चल सका। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते बिजली आपूर्ति और पोल की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती तो हादसा टाला जा सकता था। क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर पहले से भी शिकायतें होने की बात सामने आई है। लोगों के अनुसार बनभूलपुरा में कई स्थानों पर बिजली के तार झूल रहे हैं। बरसात के दौरान इनसे खतरा और बढ़ जाता है। लाइन नंबर 12 के ट्रांसफार्मर में मंगलवार को भी चिंगारी निकलती दिखाई दी। स्थानीय लोगों का दावा है कि ट्रांसफार्मर से आए दिन चिंगारी निकलती है, लेकिन शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। पार्षद सलीम सैफी ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम का रवैया संवेदनहीन है और विभाग के आपातकालीन नंबर पर भी शिकायतों का तत्काल समाधान नहीं होता। शकील सलमानी ने कहा कि क्षेत्र में लटकते तारों और ट्रांसफार्मर में चिंगारी की शिकायत पहले भी तहसील दिवस में की जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने बरसात के मौसम को देखते हुए घरों के आसपास बिजली के पोल और तारों की विशेष जांच कराने तथा ऐसी व्यवस्था करने की मांग की है, जिससे करंट फैलने की घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने विभाग पर लगाए जा रहे आरोपों से अलग दावा किया है। उनका कहना है कि नदीम एसी की आउटडोर यूनिट में दौड़ रहे करंट की चपेट में आए थे और उन्हें बचाने के प्रयास में उनकी बेटी भी करंट की चपेट में आ गईं। उनके अनुसार बिजली का पोल घर से करीब दो फीट दूर था और उसमें एलटी एबी केबल लगी थी। अधिकारी का दावा है कि घटना के समय पोल में करंट नहीं था और कर्मचारियों ने आसपास के अन्य पोलों की भी जांच की थी। हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पोल में करंट नहीं था तो सुबह गाय और स्थानीय लोगों को बिजली का झटका कैसे लगा? स्थानीय लोगों की शिकायतों और ऊर्जा निगम के दावे के बीच सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पिता-पुत्री की मौत ने क्षेत्र में बिजली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।