उत्तराखंड हाईकोर्ट: चारधाम यात्रा की अव्यवस्थाओं और घोड़ो की मौतों पर हाईकोर्ट राज्य सरकार के जवाबों से नही हुआ संतुष्ट! अब तक 600 से ज़्यादा घोड़ो की हो चुकी है मौत, कोर्ट ने सरकार से पूछा ये अहम सवाल
उत्तराखंड हाईकोर्ट में चारधाम यात्रा में फैली अव्यवस्थाओं और लगातार हो रही घोड़ों की मौतों के मामले में दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई। कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए गए जवाब से हाई कोर्ट संतुष्ट नहीं है। मामले में अब कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब मांगा है।
आज हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि उन्होंने वैटनरी डॉक्टर के साथ अन्य सुविधाओं को बढ़ाया है। यात्रा मार्ग में पानी के साथ घायल घोड़ो की देखरेख की जा रही है। कोर्ट में सरकार ने कहा कि एक एसओपी ही अभी शासन में लंबित है जिसे जल्द लागू करेंगे,लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं रही। कोर्ट ने सरकार को विस्तृत रिपोर्ट फाइल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि घायल जानवरों को रखने की क्या व्यवस्था है और अनफिट जानवरों का क्या हुआ। कब तक एसओपी को लागू किया जाएगा कुल कितने लोगों और जानवरों घोड़े खच्चरों को जाने की अनुमति एक दिन में दी जा सकती है। इससे पहले हाई कोर्ट ने 600 से अधिक घोड़ों की मौत पर कोर्ट ने केंद्र राज्य समेत चारधाम यात्रा के जिलों के डीएम को नोटिस जारी किये थे। कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने सरकार से पूछा है कि क्यों ना चारधाम यात्रा में एक कमेटी का गठन कर दिया जाए।
आपको बतादें कि समाजसेवी और पशु प्रेमी गौरी मौलेखी ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि चारधाम यात्रा में अब तक 600 घोड़ों की मौत हो गयी जिससे उस इलाके में बीमारी फैलने का खतरा बन गया है, याचिका में कहा गया है कि जानवरों और इंसानों की सुरक्षा के साथ उनको चिकित्सा सुविधा दी जाए। एसके साथ याचिका में कहा है कि चारधाम यात्रा में भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है जिससे जानवरों और इंसानों को दिक्कतें खाने रहने की आ रही है। कोर्ट से मांग की गई है कि यात्रा में कैरिंग कैपेसिटी के हिसाब से भेजा जाए, उतने ही लोगों को अनुमति दी जाए जितने लोगों को खाने पीने रहने की सुविधा मिल सके।