Sep 01, 2026 Login

उत्तराखण्ड: मदरसों पर नए मानकों को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई! याचिकाकर्ताओं ने कहा- अचानक नियम लागू होने से पुराने मदरसों पर मंडरा रहा बंद होने का खतरा

Uttarakhand: High Court hearing on new standards for madrasas! Petitioners state that the sudden implementation of rules puts existing madrasas at risk of closure.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित मदरसों पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025 के तहत लागू किए गए कुछ निर्धारित मानकों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि नए एक्ट में मदरसों पर स्कूलों की तरह कई तरह के रेगुलेशन लागू किए गए हैं, जबकि मदरसे पारंपरिक स्कूलों की तरह संचालित नहीं होते। याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि नए मदरसों के लिए इन मानकों का पालन करना संभव हो सकता है, लेकिन दशकों से संचालित पुराने मदरसों पर इन्हें अचानक लागू करने से उनके सामने संस्थान बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। बता दें कि ऊधमसिंह नगर की केबीएन सोसाइटी से जुड़े मदरसों समेत अन्य मदरसों की ओर से दाखिल की गई हैं। याचिकाओं के मुताबिक, मदरसा सोसाइटी के तहत वर्ष 2006 से इन मदरसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है और इन्हें उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त है।
याचिका में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिनके तहत जून 2026 में मदरसों और स्कूली शिक्षा से जुड़े मानकों में संशोधन कर नए मानक निर्धारित किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कम समय में इन नए मानकों को पूरा करना पुराने मदरसों के लिए मुश्किल है। ऐसे में आगामी शैक्षणिक सत्र में इनके बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे इनमें पढ़ने वाले हजारों बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित होने की आशंका है। याचिकाकर्ता पक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।अदालत को यह भी बताया गया कि नए संशोधन के तहत निर्धारित प्रक्रिया और मानकों का पालन नहीं करने पर पांच लाख रुपये तक के जुर्माने के साथ मदरसा बंद करने का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन मदरसों को सरकार से संचालन के लिए कोई अनुदान नहीं मिलता है, इसलिए उन्हें नए प्रावधानों के तहत राहत देते हुए संचालन की अनुमति दी जानी चाहिए।