Sep 01, 2026 Login

Kumaun University Nainital: सिटिंग VC ने खुद चुनी सर्च कमेटी, पूर्व सहयोगी को बनाया नॉमिनी’ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाले का फटा ढोल

Kumaun University Nainital: Sitting VC Appointed His Own Search Committee, Made Former Associate the Nominee; The Pretense of Integrity Falls Flat

नैनीताल : कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति पद की चयन प्रक्रिया में भारी अनियमितता और नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। भारत सरकार और यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए वर्तमान कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत द्वारा सर्च कमेटी के गठन में 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का सीधा मामला उजागर हुआ है। पूर्व कुलपति दीवान सिंह रावत को लेकर राज्यपाल को की गयी एक शिकायत में कहा गया है कि प्रो. रावत ने कुलपति के दूसरे कार्यकाल में खुद का चयन कराने के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से अपने घनिष्ठ मित्र के नाम का नए कुलपति के चयन हेतु सर्च कमेटी में अनुमोदन किया है जबकि कुलपति की चयन प्रक्रिया के लिए बनाई गयी सर्च कमेटी में वर्तमान कुलपति को पूरी तरह से अलग रहना होता है ।

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्च शिक्षा विभाग) के दिनांक 12 मार्च 2015 को जारी  आधिकारिक आदेश संख्या File.No.18-12/2016 और यूजीसी की पारदर्शी चयन प्रक्रिया के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट व्यवस्था दी गई है कि यदि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति दूसरे कार्यकाल (Second Term) के लिए दावेदार हैं, तो उन्हें कार्यपरिषद (Executive Council) की उस बैठक या एजेंडे से पूरी तरह अलग (Recuse) रहना होगा जिसमें सर्च कमेटी के लिए नॉमिनी का चयन किया जा रहा हो। सरकारी आदेश में स्पष्ट दर्ज है कि कोई कुलपति या कार्यपरिषद सदस्य स्वयं पद का इच्छुक होने के बावजूद सर्च कमेटी के नॉमिनी चयन वाली बैठक में भाग लेता है या उसकी अध्यक्षता करता है, तो उसे कुलपति पद की उम्मीदवारी के लिए स्वतः अयोग्य (Deemed to be Disqualified) माना जाएगा।

कुमाऊं यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों के मुताबिक, 23 मार्च 2026 को कुमाऊं विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की 157वीं बैठक वीसी दीवान सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित की गई ।  बैठक के मद संख्या 2026:157:20 के तहत नए कुलपति के चयन हेतु सर्च कमेटी के लिए आईआईटी कानपुर के प्रो. विनोद कुमार सिंह के नाम का अनुमोदन किया गया। आरोपों के अनुसार  प्रो. विनोद कुमार सिंह और प्रो. दीवान सिंह रावत वर्ष 2007 से पूर्व IISER मोहाली में एक साथ कार्य कर चुके हैं और दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध बताए जाते हैं। नियमों के तहत, प्रो. रावत को इस बैठक की अध्यक्षता छोड़नी चाहिए थी और चर्चा से बाहर रहना चाहिए था। बैठक की अध्यक्षता कर अपने ही पूर्व सहयोगी को नॉमिनी बनवाने के कारण प्रो. रावत की उम्मीदवारी नियमों के तहत पूरी तरह अवैध हो गई।

 

 

विश्वविद्यालय के कुलपति पद हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2026 तय की गई थी। प्रो. रावत को यह भली-भांति ज्ञात था कि सर्च कमेटी में उनके सीधे हस्तक्षेप के चलते उनका आवेदन भारत सरकार के 2015 के नियमों के तहत प्रथम दृष्टया ही खारिज (Invalid) हो जाएगा। इसी कारण उन्होंने 10 अगस्त तक आवेदन दाखिल नहीं किया। इसके बाद, जब प्रशासनिक विफलता, भू-विज्ञान की छात्रा के गंभीर आरोप और प्रेस कॉन्फ्रेंस के विवादित बयानों को मीडिया द्वारा उजागर किया गया, तो प्रो. रावत ने 11 अगस्त को संदेश भेजकर यह दावा किया कि वे 'दूसरे टर्म के लिए आवेदन नहीं कर रहे है, जबकि सच्चाई यह थी कि वे नियमों के तहत आवेदन करने के योग्य ही नहीं रह गए थे। इस पूरे मामले को लेकर महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति को शिकायत भेजी गई थी, जिसमें भारत सरकार के नियमों और 157वीं कार्यपरिषद बैठक के मिनट्स संलग्न कर मांग की गई थी कि प्रो. दीवान सिंह रावत की उम्मीदवारी को नियमों के उल्लंघन के आधार पर आधिकारिक रूप से निरस्त किया जाए। चौतरफा कानूनी व प्रशासनिक दबाव,छात्र आंदोलनों और छात्रा द्वारा सीएम पोर्टल पर अभद्र व्यवहार करने को लेकर की गयी शिकायत के बीच प्रो. रावत को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा।