उत्तराखंड: पांच नगर निकायों में चुनावी बिगुल बजने का इंतज़ार,परिसीमन पूरा,अब निर्वाचन आयोग के पाले में गेंद
देहरादून। उत्तराखंड के पांच नगर निकायों में चुनावी सरगर्मी तेज होने वाली है। शहरी विकास विभाग ने परिसीमन और ओबीसी आरक्षण सर्वे जैसी महत्वपूर्ण औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, जिससे इन निकायों में चुनाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है। हालांकि, किच्छा और सिरौली कलां जैसे निकायों में कानूनी पेचीदगियों के चलते मामला अभी भी राज्य निर्वाचन आयोग और उच्च न्यायालय के बीच टिका हुआ है।
टिहरी जिले की नरेंद्रनगर नगर पालिका में चुनाव न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ चुनाव साल 2003 में ही होने थे, लेकिन परिसीमन के विवादों—खासकर एक गांव को शामिल करने और फिर हटाने की प्रक्रिया के कारण यह मामला सालों तक लटका रहा। अब राहत की बात यह है कि सरकार ने परिसीमन और ओबीसी सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे अब यहाँ जल्द ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल होने की उम्मीद है। ऊधमसिंह नगर की किच्छा नगर पालिका और नवनिर्मित सिरौली कलां का मामला सबसे अधिक पेचीदा है। साल 2018 में किच्छा के विस्तार के समय सिरौली कलां सहित कई क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया था, जहाँ करोड़ों के विकास कार्य भी हुए। सितंबर 2024 में सरकार ने सिरौली कलां को किच्छा से अलग कर पुन: राजस्व गांव बनाने का प्रयास किया, जिसे स्थानीय निवासियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि सरकार ने अब सिरौली कलां को अलग नगर पालिका घोषित कर दिया है, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा पुराने नोटिफिकेशन पर रोक लगाए जाने के कारण इन दोनों निकायों में चुनावी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों में चुनाव का भविष्य माननीय उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार ने ऊधमसिंह नगर में गढ़ी नेगी और चंपावत जिले में पाटी को नई नगर पंचायत का दर्जा दिया था। इन दोनों ही जगहों पर परिसीमन की कार्यवाही सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। अब केवल निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी होने का इंतजार है। उत्तराखंड के इन पांच निकायों में स्थानीय सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हजारों मतदाताओं के लिए अगले कुछ हफ्ते महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यदि कानूनी बाधाएं दूर होती हैं, तो जल्द ही इन क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है।