उत्तराखण्डः टेंडर प्रक्रिया में कोर्ट के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी! हाईकोर्ट ने पीएमजीएसवाई के मुख्य अभियंता को अवमानना का दोषी ठहराया, लिंक में जानें क्या है पूरा मामला?

 Uttarakhand: Disregarding a court order regarding the tender process proves costly! The High Court has found the Chief Engineer of PMGSY guilty of contempt; click the link to learn the full details

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक निविदा (टेंडर) प्रक्रिया से जुड़े मामले में कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक को कोर्ट के आदेश की अवमानना का दोषी ठहराया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पीएमजीएसवाई के मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक और अन्य को अदालत की अवमानना अधिनियम 1971 के तहत जानबूझकर आदेश की नाफरमानी करने का दोषी पाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों द्वारा बाद की परिस्थितियों का बहाना बनाकर न्यायिक आदेशों को दरकिनार या निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता।

​यह पूरा मामला मेसर्स राम कृष्ण जयरा द्वारा विभाग की एक निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से जुड़ा है, जिसमें तकनीकी मूल्यांकन के दौरान याचिकाकर्ता फर्म को गलत तरीके से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके खिलाफ फर्म ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। करीब डेढ़ साल तक लंबित रहने के बाद कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता फर्म की वित्तीय बोली को शामिल किया जाए और कानून के अनुसार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। लेकिन रिट कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद विभाग ने वित्तीय बोली खोलने के बजाय पूरी टेंडर प्रक्रिया को यह कहते हुए रोक दिया कि अन्य बोलीदाताओं ने अपनी निविदा की वैधता अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। प्रतिवादियों की ओर से तर्क दिया गया कि अब केवल एक ही बोलीदाता बचा है, जिससे टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह स्थिति खुद उत्तरदाताओं द्वारा पैदा की गई है और यह केवल एक सोची-समझी रणनीति है ताकि रिट कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी और विफल किया जा सके। ​मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने प्रतिवादियों को आदेश जारी किया है कि वे 26 फरवरी 2026 के रिट कोर्ट के आदेश का 10 दिनों के भीतर सख्ती से पालन करें और अगली सुनवाई पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो मुख्य अभियंता को सजा भुगतने के लिए अगली तारीख 27 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। पूरा मामला उत्तरकाशी का है।