उत्तराखंड: सड़क पर नमाज पढ़ने पर सीएम धामी का फिर बड़ा बयान! कहा-चिन्हित स्थलों पर ही अदा हो नमाज

Uttarakhand: CM Dhami Issues Another Major Statement on Offering Namaz on Roads! Says: Namaz Should Be Offered Only at Designated Sites.

देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के पीक सीजन के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों के उपयोग को लेकर एक बड़ा और सख्त बयान दिया है। हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने साफ तौर पर कहा कि प्रदेश में नमाज पढ़ने पर किसी प्रकार की कोई रोक या मनाही नहीं है, लेकिन यह केवल चिन्हित और निर्धारित स्थलों पर ही अदा की जानी चाहिए। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि किसी भी धार्मिक गतिविधि के कारण सड़क, यातायात या आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। सीएम के इस बयान के बाद राज्य में सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में कुमाऊं मंडल और जिले के आला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सुगम ट्रैफिक प्रबंधन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, पार्किंग और सबसे महत्वपूर्ण 'चारधाम यात्रा' की व्यवस्थाओं को लेकर बिंदुवार चर्चा की गई। सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने खुले में नमाज के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में पवित्र चारधाम यात्रा चल रही है, जिसके चलते लाखों की संख्या में श्रद्धालु देवभूमि पहुंच रहे हैं। ऐसे में यात्रा मार्गों और प्रमुख शहरों में व्यवस्थाएं सुचारू रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए 24 घंटे लगातार निगरानी कर रही है। सरकार का एकमात्र प्रयास यही है कि उत्तराखंड आने वाला हर एक श्रद्धालु यहाँ से एक सुखद और बेहतर अनुभव लेकर अपने घर लौटे। सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस बयान के बाद उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में घमासान मच गया है। पक्ष और विपक्ष के तमाम राजनीतिक दल इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गए हैं और अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जहाँ एक तरफ सत्तापक्ष इसे कानून-व्यवस्था और जनहित में उठाया गया जरूरी कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों की बयानबाजी से प्रदेश का राजनैतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है।