उत्तराखंड चारधाम यात्रा: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग का 'कवच' तैयार, 13 भाषाओं में परामर्श और हाईटेक अस्पतालों से लैस होंगे यात्रा मार्ग

Uttarakhand Char Dham Yatra: Health Department's 'Kavach' (Shield) Ready for Devotee Safety; Yatra Routes to Feature Guidance in 13 Languages ​​and High-Tech Hospitals.

देहरादून। विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष अपनी तैयारियों को एक 'अभूतपूर्व मॉडल' के रूप में पेश किया है। पिछले वर्षों के अनुभवों से सीख लेते हुए, इस बार विभाग ने न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया है, बल्कि तकनीकी और मानवीय संसाधनों का एक ऐसा जाल बिछाया है जिससे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी श्रद्धालुओं को त्वरित इलाज मिल सके। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने दावा किया है कि इस बार की यात्रा न केवल आस्था, बल्कि सुरक्षा और सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की भी नई मिसाल पेश करेगी। चारधाम यात्रा के चुनौतीपूर्ण मार्गों पर स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 57 विशेष स्क्रीनिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य उन यात्रियों की पहचान करना है जो हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। विभाग का लक्ष्य है कि जोखिम वाले यात्रियों को समय रहते चिकित्सीय सलाह दी जाए, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने पर उनकी जान को खतरा न हो। स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देते हुए केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में 17 बेड के अस्पतालों का संचालन शुरू कर दिया गया है। इतना ही नहीं, बदरीनाथ में 50 बेड का एक हाईटेक अस्पताल जून तक शुरू होने जा रहा है, जो यात्रियों के लिए किसी लाइफ-लाइन से कम नहीं होगा।

विभाग ने मानव संसाधन की तैनाती में भी रिकॉर्ड बनाया है। यात्रा रूटों पर:
25 विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात किए गए हैं।
178 मेडिकल ऑफिसर चौबीसों घंटे ड्यूटी पर रहेंगे।
414 पैरामेडिकल कर्मी प्राथमिक उपचार के लिए मुस्तैद हैं।

इसके अलावा, दून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से अतिरिक्त डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारा जा रहा है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर 177 एम्बुलेंस का नेटवर्क तैयार किया गया है। दुर्गम इलाकों में जहाँ सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां के लिए हेलीकॉप्टर रेस्क्यू की सुविधा सुनिश्चित की गई है। साथ ही, श्रद्धालुओं की मदद के लिए 112, 108 और 104 जैसे हेल्पलाइन नंबरों को सक्रिय रखा गया है। देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए 13 क्षेत्रीय भाषाओं में स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। इससे दक्षिण से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक के यात्रियों को अपनी भाषा में स्वास्थ्य नियमों को समझने में आसानी होगी। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, "चारधाम यात्रा लाखों लोगों की श्रद्धा का विषय है। हमारा मकसद है कि किसी भी श्रद्धालु को इलाज के अभाव में परेशान न होना पड़े। हमने हर जिले में मेडिकल रिलीफ पोस्ट तैयार की हैं और गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए एक विशेष सिस्टम बनाया है। सरकार के इन प्रयासों से साफ है कि इस बार उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालु बाबा केदार और बदरी विशाल के दर्शन सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण में कर सकेंगे।