नैनीताल:पहले कृषि, फिर अकृषि, फिर बिक्री...क्या पहाड़ की जमीनें योजनाबद्ध तरीके से जा रही है बाहरियों के हाथों में?143 की आड़ में हो रहा है जमीनों का कारोबार! लिंक में पढ़ें पूरी खबर
नैनीताल। भवाली क्षेत्र के नगरीगांव निवासी दयासागर ने जिलाधिकारी नैनीताल को ज्ञापन सौंपकर कृषि भूमि को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से अकृषि (धारा-143) घोषित कर बाहरी व्यक्तियों को बेचे जाने के मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नगरीगांव स्थित खाता संख्या-245 के अंतर्गत दर्ज कृषि भूमि को वर्ष 2022 में इस आधार पर धारा-143 के तहत अकृषि घोषित कराया गया था कि भूमि का उपयोग मत्स्य पालन, बागवानी और कुक्कुट पालन जैसे कृषि आधारित कार्यों के लिए किया जाना है। लेकिन बाद में उक्त भूमि को बाहरी व्यक्ति के नाम बेच दिया गया, जिससे भूमि रूपांतरण की वास्तविक मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रार्थी का कहना है कि संबंधित भूमि अनुसूचित जाति (शिल्पकार) परिवार की पुश्तैनी भूमि रही है और भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर उसे बाहरी व्यक्तियों के हाथों बेचा गया। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे मामले में भूमाफियाओं की संलिप्तता हो सकती है तथा भूमि से जुड़े अन्य विवादित मामलों में भी कथित रूप से फर्जी कार्यवाहियां कराई गई हैं।
दयासागर ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि गांव के अन्य खातेदारों द्वारा भी पूर्व में कृषि भूमि को अकृषि घोषित कराने के बाद बाहरी लोगों को बेचे जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में केवल एक भूमि सौदे ही नहीं, बल्कि पूरे खाते और संबंधित भूमि रूपांतरण मामलों की जांच आवश्यक है।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि भूमि की बिक्री उच्च न्यायालय द्वारा भूमि रूपांतरण से संबंधित मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों की भावना के विपरीत प्रतीत होती है। इसलिए संबंधित सभी भूमि सौदों, धारा-143 के तहत पारित आदेशों और बाद में हुई बिक्री की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रार्थी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर गहन जांच कराई जाए ताकि अनुसूचित जाति परिवारों के भूमि अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।