Oct 12, 2026 Login
Awaaz24x7-government

उत्तराखंड ब्रेकिंग: अब हर तीन साल में पर्यावरण संरक्षण की जमीनी हकीकत बयां करेंगे प्रशासनिक अधिकारी! हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश, नदियों में अतिक्रमण पर जताई नाराजगी

Uttarakhand Breaking: Now administrative officers will tell the ground reality of environmental protection every three years! High court gave strict instructions, expressed displeasure over encroachm

नैनीताल। उत्तराखंड की नदियों में लगातार हो रहे अतिक्रमण पर सख्त नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। 
हाईकोर्ट ने देहरादून के सहत्रधारा, आमवाला  व राऊ नदी क्षेत्र में नदी की भूमि पर अवैधरूप से कब्जा करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए है कि वह हर तीन वर्ष में उत्तराखंड के पर्यावरण संरक्षण की जमीनी हकीकत बयां करती एक विस्तृत रिपोर्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया से बनवाएंगे, जिसमे जल, जंगल जमीन के साथ साथ वायु की स्तिथि और पूरे पर्यावरण दृष्टिकोण का बखान किया जायेगा। न्यायालय ने यह भी कहा है कि देहरादून, नैनीताल समेत सभी शहरों की ऐसी रिपोर्ट अलग से हर दो वर्ष में तैयार की जाएगी, ताकि अनियंत्रित शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित किया जा सके। कोर्ट ने जिलाधिकारी देहरादून को 14 दिसंबर तक एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर यह भी बताने को कहा है कि अतिक्रमण सम्बन्धी शिकायतों की कितने पत्रावली उनके दफ्तर में एक वर्ष में मिली है और उन्होंने उस पर अब तक क्या कार्यवाही की है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 15 दिसंबर की तिथि नियत की है। 
      आपकों बता दे देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अजय नारायण शर्मा ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि देहरादून के सहस्त्र धारा क्षेत्र व डांडा- लख़ौंड क्षेत्र में, आमवाला की राऊ नदी भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए सचिव राजस्व, जिला अधिकारी देहरादून, नगर आयुक्त, उपाध्यक्ष मसूरी दून विकास प्राधिकरण को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा था।