Sep 07, 2026 Login

उत्तराखण्ड ब्रेकिंगः हल्द्वानी रामलीला मैदान ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई! सरकार ने दिया जांच का भरोसा, कहा- दो FIR दर्ज, बेंगलुरु की जीरो FIR होगी हल्द्वानी ट्रांसफर

Uttarakhand Breaking: High Court hearing on the Haldwani Ramlila Maidan ‘purification’ controversy! The government assured an investigation, stating that two FIRs have been registered and the ‘Zero F

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ से जुड़े चर्चित मामले में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस प्रकरण में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें एक एफआईआर हल्द्वानी में दर्ज हुई है, जबकि दूसरी अखबारों में प्रकाशित खबर के आधार पर बेंगलुरु में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज की गई है, जिसे जांच के लिए हल्द्वानी ट्रांसफर किया जाना है।सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी। साथ ही, मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की बात भी कोर्ट के सामने कही गई। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित कर दिया। दरअसल, देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद सार्वजनिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल छिड़ककर सभा स्थल का शुद्धिकरण किया गया, जिससे समाज में वैमनस्यता फैलने की आशंका है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि हल्द्वानी में शुद्धिकरण करने वालों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दी गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों, जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग और क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं, को सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग की थी। इसके साथ ही याचिका में राज्य सरकार को मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, सूचना के अधिकार के तहत भी इस घटनाक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई हैं, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद अलग-अलग पक्षों की ओर से स्पष्टीकरण और धार्मिक बयानबाजी भी सामने आई थी। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा था।