उत्तराखंड ब्रेकिंग:छात्राएं ध्यान दें!जिन छात्राओं को नंदा गौरा योजना का लाभ नही मिला,वो छात्राएं 30 नवम्बर तक कर सकती है आवेदन,किन दस्तावेजों की होगी ज़रूरत लिंक पर क्लिक करें और जानें।
उत्तराखंड में नंदा गौरा योजना के तहत मिलने वाला पैसा छात्राओं को आवंटित नही हो पा रहा था जिसके विरोध में छात्राएं और अभिभावक राज्य सरकार से लगातार मांग करते आ रहे थे।राज्य सरकार ने उन सभी छात्राओं को राहत देते हुए नंदा गौरा योजना के लाभ लेने की तिथि तय कर दी है।इसके लिए 12 वीं पास छात्राएं 30 नवम्बर तक आवेदन कर सकती है।छात्राएं बाल विकास परियोजना कार्यालय से आवेदन फॉर्म निशुल्क प्राप्त कर सकती है।आवेदन करने के लिए छात्राओं के निम्न कागज आवश्यक रूप से चाहिए होंगे।
1-12वीं पास का रिजल्ट ।
2-आवेदक छात्रा का एकल बैंक का खाता।
3-जन्मतिथि प्रमाण पत्र ।
4-आधार कार्ड ।
5-अविवाहित प्रमाण पत्र जो कि प्रधान या आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वारा जारी किया गया हो।
6-एसडीएम द्वारा जारी स्थायी प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की कॉपी।
7-स्कूल प्रधानाचार्य द्वारा संस्तुति।
8-बालिका का नवीनतम फ़ोटो।
9-बालिका की माता का आधार कार्ड।
10-आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वारा संस्तुति।
नंदा गौरा योजना का लाभ गरीबी रेखा से नीचे,बीपीएल परिवारों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों, उत्तराखंड के मूल निवासी,और अभिभावकों की मासिक आय 6 हज़ार या वार्षिक आय 72 हज़ार होनी चाहिए।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा नंदा गौरा योजना शुरू के तहत 2017 से पहले 12वीं पास करने के बाद 51 हज़ार छात्राओं को दिए जाते थे तब ये योजना समाज कल्याण के हाथों में थी,लेकिन 2017 के बाद ये योजना बाल कल्याण विभाग के पास चली गयी जिसके बाद छात्राओं को इस योजना का लाभ मिलना लगभग बंद हो गया,आंकड़ों के मुताबिक 2020 सितंबर माह तक 1889 बालिकाएं इस योजना से वंचित रही थी और बाल विकास की ओर से कहा गया था कि पर्याप्त बजट न होने के चलते ऐसा हुआ है बजट आते ही इस योजना का लाभ बच्चियों को मिलेगा।इसके बाद राज्य में छात्राओं सहित उनके अभिभावकों ने तमाम जनप्रतिनिधियों को इस बाबत शिकायत भी की थी।
लंबे समय के बाद इस योजना का लाभ फिर से बालिकाओं को मिलेगा।गौरा देवी कन्या धन योजना का लाभ 12वीं पास लकड़ियां ले सकती है जिसके तहत छात्राओं को 51 हज़ार की धनराशि शिक्षा या शादी के लिए दिए जाते है।इस योजना का लाभ एक परिवार की दो बालिकाओं को मिलता है।इस योजना के बाद गांव गांव में लोग अपनी बच्चियों को स्कूल भेजने लगे थे ताकि उनके भविष्य में जब वो 12वी पास करे तो या तो शादी के लिए या आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए पर्याप्त धन मिल सके।