उत्तराखण्डः फिर सामने आई बीजेपी नेताओं की आपसी तकरार! सल्ट में ‘जन-जन की सरकार’ शिविर बना सियासी अखाड़ा, जिला पंचायत सदस्य ने विधायक जीना पर लगाए गंभीर आरोप! वीडियो वायरल

Uttarakhand: BJP leaders' infighting has surfaced once again! The "Jan-Jan ki Sarkar" camp in Salt has become a political arena, with a district panchayat member leveling serious allegations against

रामनगर। अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने भाजपा नेताओं का आपसी विवाद सतह पर ला दिया। दरअसल, यहां बीजेपी के दो नेताओं में जमकर बहस हुई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि बहस एक कार्यक्रम के दौरान मामूली सी बात को लेकर शुरू हुई, लेकिन देखते-देखते ही विवाद बढ़ गया। जानकारी के मुताबिक बुधवार, 18 फरवरी को ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के न्याय पंचायत मछोड़ के राजकीय इंटर कॉलेज में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर ही लाभार्थियों का पंजीकरण भी किया गया, लेकिन इसी दौरान शिविर में उस समय माहौल गरमा गया, जब बीजेपी विधायक महेश जीना और भाजपा के जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी के बीच कहासुनी हो गई।

बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को चाय-पानी वितरण को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते बहस में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी ने विधायक निधि के खर्च पर सवाल उठाते हुए आरटीआई के आधार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 10,500 रुपये की दरी, 8000 रुपये की ढोलक और 2500 रुपये के चिमटे की खरीद दर्शायी गई है, जो बांटा गया है। फिलहाल वायरल वीडियो के बाद क्षेत्र की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। वहीं मामले पर सल्ट विधायक महेश जीना का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि शिविर में जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी ने कार्यक्रम स्थल के अंदर ही खाने-पीने की व्यवस्था की थी। प्रशासन ने इस पर आपत्ति जताते हुए व्यवस्था को बाहर करने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद हंसा नेगी भड़क गए और अनावश्यक विवाद करने लगे। उधर जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा है। हंसा नेगी का कहना है कि उस शिविर में काफी दूर से लोग पहुंचे थे। उनके लिए ही अंदर खाने-पीने और चाय-पानी का इंतजाम किया गया था। उनके द्वारा लोगों को पहले से ही शिविर की जानकारी दी गई थी। पूरी व्यवस्था जनसहयोग के रूप में की गई थी, जिसका विरोध गलत तरीके से किया गया है।