Uttarakhand Assembly Session 2026: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का BJP पर पलटवार, क्या सत्र केवल सरकार का बखान करने लिए होता है?सवाल उठाना हंगामा नहीं,लोकतांत्रिक अधिकार

Uttarakhand Assembly Session 2026: Leader of Opposition Yashpal Arya hits back at BJP, says raising questions is not a ruckus, a democratic right

देहरादून, 21 फरवरी 2026।


उत्तराखंड विधानसभा सत्र को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के उस बयान पर कड़ा प्रतिवाद किया है, जिसमें कांग्रेस पर सत्र के दौरान “सिर्फ हंगामा” करने का आरोप लगाया गया था।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन जनता के ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देना सरकार की असली परीक्षा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर स्पष्ट उत्तर देने से बचती है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जुड़े लगभग 40 विभागों के प्रश्नों के लिए प्रश्नकाल नियत नहीं किया जाता, तो विपक्ष के पास अपनी आवाज बुलंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इसे “हंगामा” कहना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है।
यशपाल आर्य ने सवाल उठाया कि क्या विधानसभा सत्र केवल सरकारी उपलब्धियों के बखान और पूर्व-लिखित भाषणों के पाठ के लिए बुलाया जाता है? उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से जूझते युवाओं, पलायन से खाली होते गांवों, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों, बढ़ते भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों को सदन में उठाना विपक्ष का दायित्व है।
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक नियमों के तहत चर्चा की मांग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नियम 310 सहित सभी संसदीय प्रावधानों का लोकतांत्रिक तरीके से उपयोग किया जाएगा। उनके अनुसार असली सवाल यह है कि यदि सब कुछ ठीक है तो सरकार प्रश्नकाल से परहेज क्यों कर रही है और तथ्यों के साथ जवाब देने से क्यों बच रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है, एकतरफा घोषणाओं से नहीं। सदन सरकार का मंच नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ का मंच है। विपक्ष की आवाज को “हंगामा” बताकर दबाने का प्रयास उन लाखों नागरिकों की आवाज दबाने जैसा है, जिनकी समस्याएं विपक्ष सदन में उठा रहा है।
अंत में नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि कांग्रेस न तो डरने वाली है और न ही झुकने वाली। जनता के अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए संघर्ष सदन के भीतर भी जारी रहेगा और सड़क पर भी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सत्र को औपचारिक कार्यक्रम बनाना चाहती है, तो उसे याद रखना चाहिए कि मजबूत विपक्ष ही लोकतांत्रिक संतुलन की गारंटी है, और कांग्रेस इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हर संवैधानिक लड़ाई लड़ेगी।