सीतामढ़ी में अनोखा नजारा: पुलिस सुरक्षा और हथकड़ी में नीट परीक्षा देने पहुंचा जेल में बंद युवक

Unusual scene in Sitamarhi: Incarcerated youth arrives to take NEET exam under police security and in handcuffs.

सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले से रविवार को एक ऐसा विहंगम और अनोखा दृश्य सामने आया, जिसने न केवल परीक्षा केंद्र पर मौजूद लोगों को, बल्कि पूरे सूबे को हैरान कर दिया। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' में शामिल होने के लिए एक युवक हाथों में हथकड़ी पहने और पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे में परीक्षा केंद्र पहुंचा। सलाखों के पीछे बंद होने के बावजूद कानून और शिक्षा के इस अनूठे समन्वय को देखकर परीक्षा केंद्र पर मौजूद अन्य छात्र, अभिभावक और आम राहगीर अपनी आंखें फटी की फटी रह गए। यह पूरा वाकया डुमरा स्थित कमला गर्ल्स स्कूल परीक्षा केंद्र का है। रविवार को जब नीट परीक्षा को लेकर केंद्र के बाहर परीक्षार्थियों की चेकिंग चल रही थी, तभी पुलिस की एक विशेष वैन आकर रुकी। गाड़ी से भारी सुरक्षा के बीच हथकड़ी पहने एक कैदी छात्र उतरा। इस अनोखे परीक्षार्थी को देखने के लिए केंद्र के बाहर अचानक कौतूहल का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, परीक्षार्थी की पहचान सीतामढ़ी जिले के कन्हौली बगहा गांव निवासी अफजद अली के रूप में हुई है, जो मंसूर अंसारी का पुत्र है। अफजद वर्तमान में आपसी मारपीट के एक आपराधिक मामले में सीतामढ़ी मंडल कारा (जेल) में बंद है।

दरअसल, जेल जाने से पहले अफजद अली ने डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए नीट परीक्षा का फॉर्म भरा था। उसका परीक्षा केंद्र डुमरा के कमला गर्ल्स स्कूल में अलॉट हुआ था, लेकिन इसी बीच वह एक कानूनी मामले में फंसकर जेल चला गया। परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर अफजद ने अपने भविष्य और करियर का हवाला देते हुए न्यायालय (कोर्ट) से परीक्षा में शामिल होने की गुहार लगाई थी। मामले की संवेदनशीलता और शिक्षा के अधिकार को सर्वोपरि रखते हुए अदालत ने एक बड़ा और मानवीय फैसला सुनाया। कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि कड़ी सुरक्षा के बीच छात्र को परीक्षा में शामिल कराया जाए ताकि उसका पूरा साल बर्बाद न हो। अदालत के आदेश के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमा तुरंत एक्शन में आ गया। रविवार को परीक्षा के निर्धारित समय से पहले पुलिस की एक विशेष टीम अफजद को जेल से सीधे वैन में लेकर परीक्षा केंद्र पहुंची। परीक्षा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद थी कि खुद सदर एसडीपीओ राजीव कुमार सिंह मौके पर कैंप कर रहे थे। उन्होंने अपनी देखरेख में पूरी प्रवेश प्रक्रिया को संपन्न कराया। सुरक्षा मानकों और कोर्ट के गाइडलाइंस का हवाला देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया पालन करते हुए परीक्षार्थी अफजद अली को परीक्षा में शामिल कराया गया है। सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है और परीक्षा हॉल के भीतर भी उस पर विशेष नजर रखी गई, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता, गोपनीयता और सुरक्षा में कोई खलल न पड़े। इस अनोखी घटना की चर्चा अब पूरे सीतामढ़ी जिले सहित सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से हो रही है। आम तौर पर लोग अपराधियों को केवल अदालत या जेल के चक्कर काटते देखते हैं, लेकिन हथकड़ी में जकड़े होने के बावजूद एक युवक के भीतर पढ़ाई और डॉक्टर बनने के जज्बे को देख हर कोई दंग है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे भारतीय न्यायिक व्यवस्था के संतुलित दृष्टिकोण की एक बेहतरीन मिसाल बताया है, जहाँ एक आरोपी को भी उसके बुनियादी शिक्षा और भविष्य को संवारने के अवसर से वंचित नहीं किया गया। तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस परीक्षा के शांतिपूर्ण समापन के बाद, पुलिस टीम अफजद अली को पुनः कड़ी सुरक्षा के बीच वापस सीतामढ़ी जेल ले गई।