लहरों पर भरोसा, हौसले में ताकतः भीमताल की गीता बिष्ट ने तोड़ी पुरुष प्रधान सोच की दीवारें! नौकायन को बनाया आत्मनिर्भरता और सम्मान का रास्ता
नैनीताल। अब तक आपने महिलाओं को टैक्सी चलाते, ऑटो या रिक्शा चलाते, बस कंडक्टर या पुलिस की वर्दी में देखा होगा। लेकिन नैनीताल जिले के भीमताल से आई एक कहानी कुछ अलग है, कुछ खास है और कुछ प्रेरणादायक भी। यहां एक महिला ने उस काम को अपना लिया, जिसे समाज अब तक पुरुषों का काम मानता रहा है और वो काम है नौकायन का। भीमताल की रहने वाली गीता बिष्ट ने अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों को हार मानने का कारण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का रास्ता बनाया। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए गीता ने नौकायन को स्वरोजगार के रूप में चुना। आज वह भीमताल झील में अपनी नाव चलाकर न सिर्फ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि समाज के सामने महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। हर सुबह गीता अपने घर के काम निपटाती हैं, बच्चों और परिवार की जरूरतों का ध्यान रखती हैं और फिर सीधे भीमताल झील की ओर निकल पड़ती हैं। झील किनारे पहुंचते ही वह अपनी नाव तैयार करती हैं और पर्यटकों का स्वागत करती हैं। उनकी नाव में बैठने वाले पर्यटक न केवल झील की खूबसूरती का आनंद लेते हैं, बल्कि गीता के अनुभवों और भीमताल से जुड़ी रोचक कहानियों से भी रूबरू होते हैं। गीता बिष्ट कहती हैं कि शुरुआत आसान नहीं थी। लोगों ने सवाल उठाए, कुछ ने तंज कसे और कुछ ने हैरानी जताई कि एक महिला नाव कैसे चला सकती है। लेकिन गीता ने नकारात्मक सोच को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने मेहनत, साहस और आत्मविश्वास के साथ इस काम को सीखा और धीरे-धीरे इसमें महारत हासिल कर ली। गीता की नाव में झील की सैर करने वाले पर्यटक विनोद सिरोही बताते हैं कि उनका अनुभव बेहद खास रहा। उनके मुताबिक गीता ने उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ झील की सैर कराई और भीमताल के इतिहास और किस्सों को बेहद रोचक अंदाज में सुनाया। विनोद कहते हैं कि गीता जैसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो परंपरागत सोच को तोड़कर नई राह बना रही हैं।