उत्तराखण्ड हाईकोर्ट का बड़ा फैसलाः बीएलओ ड्यूटी विवाद में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर का निलंबन आदेश रद्द! गंभीर आरोप का उल्लेख न होने पर कार्रवाई निरस्त

The Uttarakhand High Court has issued a significant ruling: suspending an Anganwadi supervisor over a BLO duty dispute. The action is canceled due to the absence of a serious allegation.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में बीएलओ ड्यूटी के दौरान चुनाव अधिकारी की शिकायत पर बाल विकास निदेशालय के डायरेक्टर द्वारा आंगनबाड़ी सुपर वाइजर को पद से निष्कासित किए जाने के आदेश को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने बाल विकास निदेशालय के डायरेक्टर के निलंबन आदेश को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यदि निलंबन आदेश में यह उल्लेख नहीं है कि आरोपी पर लगने वाले आरोप गंभीर श्रेणी का है, उनमें बड़ा दंड दिया जा सकता है तो ऐसा आदेश कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली 2003 के नियम 4(1) का हवाला दिया। इस नियम के अनुसार किसी भी कर्मचारी को निलंबित करते समय आदेश में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख करना अनिवार्य है कि उसके विरुद्ध आरोप इतने गंभीर हैं कि सिद्ध होने पर उसे बड़ी सजा दी जा सकती है। बता दें कि प्रीती राणा व आशा विदवांड ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि वे उत्तराकाशी आंगनबाड़ी में सुपर वाइजर के पद पर तैनात हैं। उनकी बीएलओ में ड्यूटी लगाई गई थी। इस दौरान कतिपय कुछ शिकायतों के आधार पर चुनाव अधिकारी द्वारा उनपर कार्यवाही करने के आदेश जारी किए गए। चुनाव अधिकारी के आदेशों के क्रम में बाल विकास निदेशालय के डायरेक्टर द्वारा उन्हें आंगनबाड़ी सुपर वाइजर के पद से निष्कासित कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड गवर्मेंट सर्विस पनिशमेंट नियमों के तहत आरोप सिद्ध न होने की दशा में उन्हें पद से निष्कासित नही किया जा सकता।