सिक्किम एवलॉन्च में शहीद हुए पिथौरागढ़ के लाल पंचतत्व में विलीन! पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई, बेटे के जन्मदिन पर घर आने का वादा अधूरा छोड़ गए विकास कुमार

The son of Pithoragarh, martyred in the Sikkim avalanche, was immersed in the five elements. He was given a final farewell with full military honors. Vikas Kumar left his promise of returning home fo

पिथौरागढ़। सिक्किम में एवलॉन्च की चपेट में आकर सर्वोच्च बलिदान देने वाले लांस नायक विकास कुमार आज पंचतत्व में विलीन हो गए। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार रामेश्वर घाट पर किया गया। इस दौरान हर आंख नम थी और हर दिल गर्व से भरा हुआ था। आज शुक्रवार, 3 अप्रैल को सेना की गाड़ी जब शहीद विकास कुमार का पार्थिव शरीर लेकर उनके पैतृक गांव गणकोट (सुकौली) पहुंची, तो वहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही ताबूत खोला गया, परिवार में कोहराम मच गया। सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब उनकी पत्नी प्रीति अपने पति का पार्थिव शरीर देखकर बदहवाश हो गईं और उन्हें अस्पताल ले जाने की बात कहने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला। परिजनों ने रोते-बिलखते हुए अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। गांव में एक ओर शोक की लहर थी तो वहीं दूसरी ओर अपने बेटे की शहादत पर गर्व भी साफ झलक रहा था। इस दौरान पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंतिम यात्रा के दौरान पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, विकास तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष के बीच सैकड़ों लोग इस यात्रा में शामिल हुए। सड़क के दोनों ओर खड़े लोग अपने वीर जवान की एक झलक पाने के लिए इंतजार करते नजर आए। रामेश्वर घाट पर शहीद विकास कुमार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके बड़े भाई नीरज ने उन्हें मुखाग्नि दी। साल 2023 में विकास कुमार का विवाह प्रीति से हुआ था। 4 जून 2025 को उनके घर बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने पृथ्विक रखा। विकास अपने बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने वाले थे, जिसका परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।