हाईकोर्ट में टोल टैक्स टेंडर शर्तों पर सुनवाई! नगर पालिका नैनीताल ने बदली शर्तें, एक वर्ष में दो करोड़ का कार्य की अनिवार्यता हटने के बाद याचिका निस्तारित

The High Court is hearing the toll tax tender conditions. The Nainital Municipality has changed the conditions, and the petition has been settled after the requirement of completing work worth two cr

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर पालिका नैनीताल द्वारा टोल टैक्स वसूलने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया के कुछ शर्तों को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति शिधार्थ साह की खण्डपीठ ने नगर पालिका नैनीताल की तरफ से दिए गए शपथपत्र के आधार पर याचिका को निस्तारित कर दिया है। कोर्ट में नगर पालिका द्वारा शपथपत्र देकर कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग करने वाले ठेकेदार या फर्म को इस कार्य को करने के लिए पर्वतीय राज्य में टोल टैक्स वसूलने का तीन वर्ष का अनुभव या इसी कार्य का एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का कार्य करने का अनुभव होना चाहिए। लेकिन नगर पालिका ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान अंडर टेकिंग दी कि इसे संसोधन किया गया है। जो एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का यह कार्य करने की शर्त थी, वह अब हटा दी गयी है। उसकी जगह अब एक वर्ष में दो करोड़ का कार्य कहीं भी किया होना चाहिए। इसके आधार पर कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया है। मामले के अनुसार मैसर्स अरुण कोहली ए शोल प्रोप्राईटरशिप फर्म द्वारा याचिका दायर कर कहा है कि नगर पालिका परिषद नैनीताल टोल टैक्स वसूलने के लिए टेंडर निकाला गया है। टेंडर में यह शर्त रखी गयी है कि टेंडर प्रक्रिया में वही फर्म या ठेकेदार प्रतिभाग कर सकता है। जिसकों पर्वतीय राज्यों में इस कार्य को करने का तीन वर्ष का अनुभव हो या जिसके पास यह कार्य करने का एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का कार्य करने का अनुभव हो। याचिका में यह भी कहा गया है कि नैनीताल के अलावा कहीं टोल टैक्स नही है। इसलिए यह शर्त नियमों के विरुद्ध है। इसके लिए उनके पास यह अनुभव या सर्टिफिकेट नही है। वहीं दूसरी शर्त यह है कि एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का यही कार्य किया हुआ होना चाहिए, जो गलत है, इसलिए इसपर रोक लगाई जाए।