पिथौरागढ़ में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में! विज्ञप्ति से पहले ही शराब दुकानों का आवंटन, करोड़ों की बोली में भी धांधली का दावा! आरटीआई एक्टिविस्ट ने लगाए गंभीर आरोप
पिथौरागढ़। प्रदेश में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला पिथौरागढ़ के आबकारी विभाग से जुड़ा है, जहां शराब की दुकानों के आवंटन में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि विभाग ने पारदर्शिता को दरकिनार करते हुए विज्ञप्ति प्रकाशित होने से एक दिन पहले ही दुकानों का आवंटन कर दिया। जानकारी के अनुसार शराब की दुकानों के आवंटन के लिए 28 मार्च 2026 को सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी की गई थी, लेकिन इच्छुक आवेदकों को जब इसकी जानकारी मिली और उन्होंने विभाग से संपर्क किया, तो पता चला कि दुकानों का आवंटन 27 मार्च को ही कर दिया गया था। इस घटनाक्रम ने पूरे आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट लक्ष्मी दत्त जोशी ने आबकारी विभाग पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत और पारदर्शिता के अभाव में की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग ने जानबूझकर प्रक्रिया को गोपनीय रखते हुए कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। वहीं डीडीहाट क्षेत्र में एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां विदेशी शराब की दुकान के आवंटन में कथित रूप से भारी धांधली की गई। जानकारी के मुताबिक एक व्यवसायी ने 4.84 करोड़ रुपये की सबसे अधिक बोली लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने उस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर आधी बोली लगाने वाले को दुकान आवंटित कर दी। इस निर्णय से ठेकेदारों और स्थानीय व्यवसायियों में भारी रोष भी देखने को मिला था।
आरटीआई एक्टिविस्ट लक्ष्मी दत्त जोशी ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने सचिव और गृह विभाग को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। अपने शिकायती पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2024 में जनपद में शराब की दुकानों और भट्टियों की कुल संख्या 32 थी। वर्ष 2025 में 10 नई दुकानों का आवंटन किया गया, जबकि वर्ष 2026 में 14 नई दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया अपनाई गई। इस तरह मात्र दो वर्षों में दुकानों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी तेजी से दुकानों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि पिथौरागढ़ को उत्तराखण्ड में शराब नेटवर्क के विस्तार का मुख्य केंद्र बनाया जा रहा है। इस पूरे मामले ने न केवल आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है या नहीं।