आशा भोसले का वो गाना जिसे ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने कर दिया था बैन!संस्कृति के नाम पर हुआ था बैन,लेकिन अवार्ड्स की लगा दी थी झड़ी
भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले ने अपने करियर में हजारों सुपरहिट गाने दिए, लेकिन एक गाना ऐसा भी रहा जिसने उन्हें जितनी लोकप्रियता दिलाई, उतना ही विवाद भी खड़ा कर दिया। यह गाना था फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का चर्चित कल्ट पार्टी सॉन्ग “दम मारो दम”, जिसे एक समय ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन दोनों से बैन कर दिया गया था लेकिन विरोध के बीच यही गाना उन्हें बड़ा अवॉर्ड भी दिला गया।

आशा भोसले को ‘सुरों की जादूगरनी’ कहा जाता है, और उनकी आवाज ने दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। उनके गाने वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि और ज्यादा असरदार हो जाते हैं। आज जब उनका नाम लिया जाता है, तो उनके सुर, उनके अंदाज़ और उनके गानों की विरासत अपने आप सामने आ जाती है।
“दम मारो दम” – लोकप्रियता के साथ विवाद का दूसरा नाम
1971 में रिलीज़ हुआ यह गाना अपने समय का सबसे बोल्ड और अलग तरह का म्यूजिक पीस माना गया। फिल्म में जीनत अमान का हिप्पी अंदाज़ और धुएं के साथ दिखाया गया दृश्य उस दौर के समाज के लिए चौंकाने वाला था। गाने को आर.डी. बर्मन ने संगीतबद्ध किया था और इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे।
हालांकि गाने की धुन और प्रस्तुति ने युवाओं को तुरंत आकर्षित किया, लेकिन कई सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते विवाद के चलते ऑल इंडिया रेडियो ने इस गाने के प्रसारण पर रोक लगा दी, वहीं दूरदर्शन ने भी फिल्म के टीवी प्रसारण से इसे पूरी तरह हटा दिया।
विरोध के बीच मिला सम्मान
दिलचस्प बात यह रही कि जिस गाने को बैन किया गया, उसी के लिए आशा भोसले को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। यह अपने आप में एक अनोखा उदाहरण बन गया कि कला को रोकना मुश्किल है—वह अपना रास्ता खुद बना लेती है।
फिल्म का मकसद और गलतफहमी
फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा की कहानी दरअसल हिप्पी संस्कृति और नशे की लत के खतरों को दिखाने के लिए बनाई गई थी। इसमें देव आनंद अपने खोई हुई बहन (जीनत अमान) की तलाश में काठमांडू पहुंचते हैं, जहां वह नशे की दुनिया में खो चुकी होती है। फिल्म का उद्देश्य समाज को जागरूक करना था, लेकिन “दम मारो दम” के विजुअल्स और बोलों ने लोगों को यह संदेश उल्टा समझा दिया।
एक विरासत, जो हमेशा जिंदा रहेगी
आशा भोसले का संगीत सिर्फ गाने नहीं, बल्कि एक दौर की पहचान है। “दम मारो दम” जैसे गीत यह साबित करते हैं कि कला कभी सिर्फ मनोरंजन नहीं होती—वह समाज को झकझोरने की ताकत भी रखती है।