Aug 21, 2026 Login

उत्तराखण्ड में फर्जी हथियार लाइसेंसों पर STF का बड़ा शिकंजा! काशीपुर से तीन गिरफ्तार, अवैध पिस्टल, कारतूस और कूटरचित लाइसेंस बरामद

STF cracks down on fake arms licenses in Uttarakhand! Three arrested in Kashipur, illegal pistols, cartridges, and forged licenses recovered.

काशीपुर/देहरादून। उत्तराखण्ड में अवैध हथियारों और फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ और ऊधमसिंह नगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए काशीपुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। संयुक्त अभियान में पुलिस ने तीन सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, 65 कारतूस और तीन फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए हैं। इस कार्रवाई ने उत्तराखण्ड में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित किए गए संदिग्ध हथियार लाइसेंसों के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपराध मुक्त उत्तराखण्ड अभियान के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान में एसटीएफ पिछले कई महीनों से राज्यभर में हथियार लाइसेंसों की जांच कर रही है। इसी कड़ी में काशीपुर कोतवाली में हाल ही में दस लोगों के खिलाफ फर्जी शस्त्र लाइसेंस रखने और उनके आधार पर हथियार खरीदने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उसी मुकदमे की विवेचना के दौरान यह बड़ी गिरफ्तारी सामने आई है।

शाहजहांपुर के नाम पर बने थे फर्जी लाइसेंस
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों समेत कई लोगों ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से जारी दिखाए गए शस्त्र लाइसेंसों के आधार पर काशीपुर के गन हाउस से हथियार खरीदे थे। जब इन लाइसेंसों का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि संबंधित लाइसेंस वास्तव में उन व्यक्तियों के नाम जारी ही नहीं हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि लाइसेंस नंबर वास्तविक थे, लेकिन वे किसी अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थे। इससे स्पष्ट हुआ कि दस्तावेजों में कूटरचना कर फर्जी लाइसेंस तैयार किए गए और उन्हीं के आधार पर हथियार हासिल किए गए।

रातभर चले ऑपरेशन में तीन आरोपी गिरफ्तार
संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों में काशीपुर निवासी नौशाद हुसैन, जतिन कांडपाल और शाहजहांपुर निवासी अजीम शामिल हैं। इनके कब्जे से अलग-अलग बोर की पिस्टलें, बड़ी संख्या में कारतूस और कथित रूप से फर्जी लाइसेंस बरामद किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद हथियारों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
एसटीएफ ने बताया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी फर्जी शस्त्र लाइसेंसों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पूर्व की कार्रवाई में भी अवैध पिस्टल, कारतूस और फर्जी लाइसेंस बरामद हुए थे। इन मामलों के बाद जांच एजेंसियों ने राज्यभर में बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए लाइसेंसों की गहन पड़ताल शुरू की थी। उसी जांच के दौरान काशीपुर का यह मामला सामने आया।

हजारों लाइसेंसों की जांच जारी
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार उत्तराखण्ड में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए हजारों हथियार लाइसेंसों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न राज्यों के जिलाधिकारी कार्यालयों और लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरणों से अभिलेख मंगाए गए हैं। एसटीएफ का मानना है कि फर्जी लाइसेंसों के जरिए हथियार रखने वाले लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। ऐसे में जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी कारण ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। एसटीएफ ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी को फर्जी या संदिग्ध हथियार लाइसेंसों के बारे में कोई जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस या एसटीएफ को सूचित करे। विभाग ने आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी लाइसेंस तैयार करने वाला नेटवर्क कहां संचालित हो रहा था, इसमें किन लोगों की भूमिका थी और कितने लोगों ने इस माध्यम से हथियार हासिल किए। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। उत्तराखण्ड में फर्जी हथियार लाइसेंसों के खिलाफ चल रही यह कार्रवाई राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। फिलहाल एसटीएफ और स्थानीय पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है और आगे भी बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।