उत्तराखंड में 'आसमानी आफत' का अलर्ट: अब स्कूलों में पढ़ाई के बीच बजेगी 'वाटर बेल', प्यास बुझाने को छात्रों को मिलेगा विशेष ब्रेक
देहरादून। उत्तराखंड में सूरज के तीखे तेवरों ने अप्रैल के महीने में ही पसीने छुड़ा दिए हैं। बढ़ते तापमान और लू (हीटवेव) के खतरे को देखते हुए शासन ने बच्चों और आम जनमानस की सुरक्षा के लिए 'इमरजेंसी एक्शन प्लान' लागू कर दिया है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने राज्य के सभी स्कूलों में 'वाटर बेल' अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। अब स्कूलों में निश्चित अंतराल पर एक विशेष घंटी बजाई जाएगी, जिसका उद्देश्य छात्रों को याद दिलाना होगा कि वे पानी पिएं और खुद को हाइड्रेटेड रखें।
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार,अगले 4 से 5 दिनों में तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। आज, 16 अप्रैल को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इस हफ्ते के अंत तक इसके 38 डिग्री के पार जाने का अनुमान है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल को पारा सामान्य से तीन डिग्री अधिक यानी 35.4 डिग्री तक पहुंच गया था, जो बढ़ती तपिश का साफ संकेत है। सचिवालय में हुई उच्च-स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जरूरत पड़ने पर स्कूलों के समय में तत्काल बदलाव किया जाए। क्लासरूम में वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) सुनिश्चित करने के साथ-साथ सभी स्कूलों में ओआरएस के पैकेट और जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों को धूप से बचने के व्यावहारिक तरीके सिखाएं। जल संकट को देखते हुए शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन इलाकों में पानी की किल्लत है, वहां निर्माण कार्यों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी जाए। इसके अलावा, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और मुख्य बाजारों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर निकायों और संबंधित विभागों को सौंपी गई है। हर जिले को अपना 'हीट एक्शन प्लान' तैयार करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे उन 'हॉटस्पॉट्स' (अत्यधिक गर्म इलाकों) की पहचान करें जहां लू का असर सबसे ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया है कि अस्पतालों में गर्मी से संबंधित बीमारियों (हीट स्ट्रोक) के मरीजों के लिए विशेष वार्ड और बेड तैयार रखें। शासन की इस मुस्तैदी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिलचिलाती धूप के बीच जनजीवन प्रभावित न हो। मुख्य सचिव ने राज्य से लेकर गांव स्तर तक के सभी विभागों को आपसी तालमेल बिठाकर काम करने को कहा है ताकि लू से होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।