SIR का महाअभियानः 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरे चरण का ऐलान! 36.73 करोड़ मतदाताओं का होगा सत्यापन, उत्तराखंड में आठ जून से होगी शुरूआत
नई दिल्ली/देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल और असम चुनावों के बाद देशभर में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुरुवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी। इस चरण के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन और पुनरीक्षण कार्य 20 मई से अलग-अलग चरणों में शुरू किया जाएगा। निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरा देश इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के दायरे में आ जाएगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार यह विशेष गहन पुनरीक्षण जनगणना के तहत चल रही घरों की सूचीकरण प्रक्रिया और कॉमन फील्ड मशीनरी को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को विस्तृत दिशा.निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि यह प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पारदर्शिता के साथ पूरी की जा सके। इस तीसरे चरण में उत्तराखंड, ओडिशा, मिजोरम, मणिपुर, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, नागालैंड, त्रिपुरा और दिल्ली सहित कुल 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए अलग से शेड्यूल बाद में जारी किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने बताया कि इस चरण के दौरान 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। दिल्ली में यह प्रक्रिया विशेष रूप से अहम मानी जा रही हैए जहां अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे इस विशेष पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और अपने एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर भरें। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम शामिल हों और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे। आयोग के मुताबिक पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जा चुका है। इस दौरान 6.3 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 9.2 लाख बीएलए इस प्रक्रिया में शामिल रहे।