नैनीताल:पार्किंग,ट्रैफिक और अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की सख्ती!नैनीताल सुधार के लिए समिति की सिफारिशें लागू करने और चार सप्ताह में सुधार के दिए निर्देश

Nainital: High Court Cracks Down on Parking, Traffic, and Encroachments! Directs Implementation of Committee Recommendations for Nainital's Improvement and Orders Remedial Measures Within Four Weeks.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल शहर की विभिन्न समस्याओं को लेकर पर्यावरणविद प्रोफेसर अजय रावत द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति द्वारा दिए गए सुझावों को चार सप्ताह के भीतर अमल में लाया जाए। यदि किसी सुझाव के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाई आती है तो उस पर विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

दरअसल, न्यायालय ने पूर्व में नैनीताल की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए एक समिति गठित कर उससे सुझाव मांगे थे। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में 25 मई को आयोजित बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी, उपजिलाधिकारी सौरभ अग्रवाल, पुलिस एवं परिवहन विभाग के अधिकारी, नगर पालिका प्रतिनिधि, टैक्सी यूनियन पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा अधिवक्ता शामिल हुए थे।

बैठक में शहर की पार्किंग, यातायात व्यवस्था,स्थानीय नागरिकों के टोल पास, अतिक्रमण और पर्यावरणीय चुनौतियों सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने समिति को बताया कि डीएसए मैदान में लगभग 370 वाहनों, बी.डी. पांडे अस्पताल परिसर में 50 से 60 वाहनों, अंडा मार्केट में 20 से 25 वाहनों, मेट्रोपोल क्षेत्र में 150 से 200 वाहनों तथा विभिन्न होटलों में लगभग 2000 वाहनों की पार्किंग क्षमता उपलब्ध है।

पुलिस विभाग की ओर से बताया गया कि हल्द्वानी रोड, भवाली रोड, माल रोड, मल्लीताल, जू रोड और बिड़ला रोड समेत अन्य मार्गों पर लगने वाले जाम का एक प्रमुख कारण टैक्सी और दोपहिया वाहनों का अनियंत्रित संचालन है। वहीं टैक्सी यूनियन प्रतिनिधियों ने समिति के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की लगभग 500 टैक्सियां संचालित हैं, लेकिन उन्हें शहर में प्रवेश की पर्याप्त अनुमति नहीं मिल रही है। यूनियन ने स्थानीय टैक्सी वाहनों को शहर में संचालित करने की मांग उठाई।

समिति ने सुझाव दिया कि स्थानीय टैक्सी वाहन स्वामियों को सीमित एवं नियंत्रित रूप से शहर में प्रवेश की अनुमति एवं स्थानीय नागरिकों को टोल पास देने पर विचार किया जाए। साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया कि यदि कोई टैक्सी चालक नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करता है तो उसके पंजीकरण को निरस्त करने की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि शहर में केवल 62 निर्धारित टैक्सियों का संचालन हो तथा उनके पंजीकरण वर्ष 2017 के बाद के न हों। टैक्सी एजेंसियों को अधिकतम पांच वाहनों के संचालन की अनुमति तभी दी जाए, जब उनके पास स्वयं की पार्किंग सुविधा उपलब्ध हो।

समिति द्वारा प्रस्तुत अन्य सुझावों का भी न्यायालय ने अवलोकन किया और जिला प्रशासन को उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल निवासी पर्यावरणविद प्रोफेसर अजय रावत ने वर्ष 2012 में यह जनहित याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया था कि शहर में अवैध निर्माण हो रहे हैं, सूखाताल झील के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की आवश्यकता है तथा नैनीताल को इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया जाना चाहिए। इससे पूर्व न्यायालय राज्य सरकार को नैनीताल के नालों से अतिक्रमण हटाने, सूखाताल झील के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण तथा माल रोड पर भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण संबंधी निर्देश भी दे चुका है।