प्रदेशभर में बदला सरकारी और निजी स्कूलों का समय, गर्मियों में सुबह 7:45 पर खुलेंगे, दोपहर 2:05 बजे छुट्टी
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों-शिक्षकों के लिए नया समय सारिणी लागू हो गया है। शिक्षा विभाग ने गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों के लिए स्कूल खुलने और बंद होने का समय बदल दिया है। नया शासनादेश जारी करते हुए शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने कहा कि यह बदलाव बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया गया है।
गर्मियों में नया समय:
स्कूल खुलने का समय: सुबह 7:45 बजे
प्रार्थना सभा: 7:45 से 8:05 बजे तक
पहला पीरियड: 8:05 से 8:45 बजे तक
छुट्टी: दोपहर 2:05 बजे
सर्दियों में नया समय:
स्कूल खुलने का समय: सुबह 8:50 बजे
प्रार्थना सभा: 8:50 से 9:10 बजे तक
छुट्टी: दोपहर 3:10 बजे
शिक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि समय सारिणी में केवल आंशिक संशोधन किया गया है। शासनादेश की अन्य सभी शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी। हालांकि इस बदलाव पर शिक्षकों की ओर से नाराजगी जताई जा रही है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश संरक्षक सतीश घिल्डियाल ने कहा कि गर्मियों में स्कूल का समय एक घंटा पांच मिनट बढ़ा दिया गया है, जो मैदानी इलाकों के लिए ठीक नहीं है। गर्मी के मौसम में दोपहर 2:05 बजे तक स्कूल चलना छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए थकान भरा होगा। पर्वतीय क्षेत्रों में तो स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां के बच्चे कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। सुबह जल्दी स्कूल खुलने से छोटे बच्चों को अंधेरे में या ठंडे मौसम में निकलना पड़ सकता है। शिक्षक संघ का कहना है कि बच्चों की सुविधा, यात्रा का समय और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव उचित नहीं लग रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि गर्मियों में सुबह जल्दी स्कूल शुरू करने से दोपहर की तेज गर्मी से पहले छुट्टी हो जाएगी, जिससे बच्चे गर्मी के चरम समय में घर पहुंच सकेंगे। वहीं सर्दियों में देर से शुरू करके दिन की रोशनी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। नए समय सारिणी को लेकर अभिभावक और शिक्षक दोनों ही पक्षों में चर्चा तेज है। कुछ अभिभावक सुबह जल्दी स्कूल भेजने में परेशानी बता रहे हैं, तो कुछ शिक्षक दोपहर की छुट्टी को लेकर चिंतित हैं। शिक्षा विभाग अब इस नए समय सारिणी को लेकर स्कूलों में सख्ती से अमल सुनिश्चित कराएगा। देखना होगा कि यह बदलाव छात्रों की पढ़ाई के स्तर और उनके स्वास्थ्य पर कितना असर डालता है।