उत्तराखण्ड में कैबिनेट मंत्री के बेटे की शादी की तैयारियों के बीच विवाद! दर्ज हुआ केस, लिंक में जानें क्या है पूरा मामला?

A controversy has erupted in Uttarakhand amid preparations for the wedding of a cabinet minister's son! A case has been filed. Read the full story in the link below.

हरिद्वार। हरिद्वार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड सरकार के समाज कल्याण मंत्री खजान दास के बेटे की शादी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह शादी राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज में स्थित मां सुरेश्वरि देवी मंदिर परिसर में प्रस्तावित थी, जहां बड़े पैमाने पर की जा रही तैयारियों ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया। जानकारी के अनुसार आज रविवार, 26 अप्रैल की रात को शादी का कार्यक्रम निर्धारित था। इसके लिए एक दिन पहले से ही मंदिर परिसर में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। ट्रकों के जरिए टेंट, कुर्सियां, लाइटिंग और अन्य सामान जंगल के भीतर पहुंचाया गया। आरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह की अचानक बढ़ी गतिविधियों ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां हाथी, गुलदार समेत कई जंगली जानवरों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में सवाल उठने लगे कि क्या इस तरह के बड़े आयोजन के लिए किसी स्तर पर अनुमति ली गई थी या फिर नियमों को नजरअंदाज कर यह सब किया जा रहा था। राजाजी टाइगर रिजर्व में सख्त नियम लागू हैं, जिनके तहत किसी भी प्रकार के बड़े आयोजन, पंडाल या भीड़भाड़ की अनुमति नहीं दी जाती। यहां केवल सीमित धार्मिक गतिविधियों जैसे पूजा-अर्चना और भंडारे की ही इजाजत होती है। इसके बावजूद जिस तरह से शादी की तैयारियां की जा रही थीं, उसने नियमों के उल्लंघन की आशंका को और मजबूत कर दिया। मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर मंदिर परिसर में लगाए गए पंडाल और सजावट की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इसके बाद पर्यावरण प्रेमियों ने खुलकर विरोध जताया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। जैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ तो पार्क प्रशासन हरकत में आ गया। अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और बिना अनुमति लगाए गए पंडाल, टेंट और अन्य सामान को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। साथ ही मंदिर समिति के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पार्क का मुख्य गेट भी बंद कर दिया गया, ताकि आगे किसी भी तरह की गतिविधि को रोका जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रिजर्व क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मामला एक प्रभावशाली मंत्री के परिवार से जुड़ा होने के कारण शुरुआत में किसी ने इस पर रोक लगाने की हिम्मत नहीं दिखाई। हालांकि जैसे ही मामला सार्वजनिक हुआ और दबाव बढ़ा, प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं या फिर प्रभावशाली लोगों के लिए अलग व्यवस्था होती है। साथ ही यह मामला पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी को भी उजागर करता है।

वहीं कैबिनेट मंत्री खजान दास ने बताया कि वो कई सालों से सुरेश्वरी देवी मंदिर आ रहे हैं। बेटे की तबीयत भी मां सुरेश्वरी देवी के आशीर्वाद से ठीक हुई तो, उनकी इच्छा थी कि मंदिर परिसर में ही शादी की जाए। लेकिन अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी थी कि मंदिर में शादी के आयोजन की परमिशन लेनी पड़ेगी। कुछ दिन पहले भी वो मंदिर आए थे, उस समय राजाजी के अधिकारी भी उनके साथ थे, वन निदेशक ने शादी के आयोजन की हामी भी भरी। लेकिन ऐसा नहीं है कि मंदिर समिति की अनुमति से उनके द्वारा शादी की तैयारी की जा रही थी, निदेशक वन ने भी हामी भरी थी। उन्होंने  आरोप-प्रत्यारोप को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि यह दुखद और चिंताजनक विषय है। वो वन नियमों के बारे में सब जानते हैं कि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। यदि वन निदेशक उन्हें पहले ही बता देते तो वो कहीं और शादी का आयोजन कर लेते।