उत्तरकाशी में आधी रात का तांडव: जुणगा गांव में धू-धू कर जला तीन मंजिला मकान, झुलसे दो लोग, सब कुछ राख

Midnight Havoc in Uttarkashi: Three-Story House Engulfed in Flames in Junga Village; Two Injured, Everything Reduced to Ashes.

उत्तरकाशी जनपद के डुंडा तहसील अंतर्गत जुणगा गांव में रविवार देर रात एक भीषण अग्निकांड ने भारी तबाही मचाई। डांगडा तोक में स्थित एक विशाल आवासीय भवन में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस हादसे में घर के अंदर मौजूद दो लोग बुरी तरह झुलस गए, जिन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल उत्तरकाशी भर्ती कराया गया है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि प्रभावित परिवारों के पास संभलने तक का मौका नहीं रहा और उनका जीवन भर की कमाई का सामान आंखों के सामने राख के ढेर में तब्दील हो गया।

घटना रविवार देर रात की है जब पूरा गांव गहरी नींद में था। जुणगा गांव के डांगड़ा तोक में स्थित अनिल सिंह भंडारी और महेश सिंह भंडारी (पुत्र शीशपाल सिंह) के संयुक्त आवासीय भवन से अचानक लपटें उठने लगीं। इससे पहले कि ग्रामीण कुछ समझ पाते, लकड़ी से बने पुराने ढांचे के कारण आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अग्निकांड में सुमेर सिंह भण्डारी (पुत्र स्व. कृतम सिंह) और प्रमिला देवी (पत्नी सोहन सिंह) आग की चपेट में आने से झुलस गए। सूचना मिलते ही ब्रह्मखाल चौकी पुलिस और 108 सेवा मौके पर पहुंची, जिसके माध्यम से घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। ब्रह्मखाल पुलिस, फायर सर्विस और एसडीआरएफ की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक भवन पूरी तरह जलकर मलबे में बदल चुका था। ग्राम प्रधान अनिल भंडारी ने बताया कि इस हादसे में अनिल और महेश भंडारी का घर पूरी तरह नष्ट हो गया है। घर में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और जरूरी दस्तावेज सब कुछ जल गया है। प्रभावित परिवार अब खुले आसमान के नीचे आ गया है। आपदा प्रबंधन अधिकारी शरदुल गुसांई के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और प्रशासन नुकसान के सटीक आकलन में जुटा है ताकि प्रभावितों को जल्द राहत मिल सके। उत्तरकाशी जनपद में आग की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। इससे पहले मोरी ब्लॉक के फिताड़ी गांव और आराकोट के डामटी थुनारा में भी ऐसे ही भीषण अग्निकांड हुए थे, जहां करोड़ों की संपत्ति के साथ मवेशियों की भी जान गई थी। जुणगा गांव की इस घटना ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन और दुर्गम क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित परिवारों के लिए तत्काल उचित मुआवजे की मांग की है।