यमन की मिसाइलों से दहला सऊदी अरब: दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको पर हमला,कई इलाकों में बत्ती गुल
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही समूह के बीच युद्ध एक बार फिर भड़क उठा है। यमन की ओर से सऊदी अरब पर किए गए भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी 'सऊदी अरामको' से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस अचानक हुए हमले के बाद सऊदी अरब के जिजान, यानबू और दमाद जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में ज़ोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं और कई इलाकों की बिजली पूरी तरह ठप हो गई।
सऊदी सिविल डिफेंस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यानबू प्रांत के लिए 'नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म' पर आपातकालीन (इमरजेंसी) अलर्ट जारी कर दिया है। यह जवाबी कार्रवाई शुक्रवार देर रात सऊदी अरब द्वारा यमन के हूती-नियंत्रित तटीय शहर 'होदेइदा' पर की गई एयरस्ट्राइक के बाद सामने आई है। हूती से जुड़े 'अल मसीरा टीवी' के अनुसार, सऊदी अरब ने होदेइदा में दूरसंचार प्राधिकरण के परिसरों और कमरान द्वीप को निशाना बनाया था, जिसमें एक महिला घायल हुई थी। सऊदी हमले के तुरंत बाद यमन के हूती विदेश मंत्रालय ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि यह हमला सऊदी अरब को बहुत महंगा पड़ेगा और इसका करारा जवाब दिया जाएगा। चेतावनी के कुछ ही घंटों भीतर हूतियों ने मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन से सऊदी अरब के औद्योगिक ठिकानों और अरामको की सुविधाओं पर भीषण हमला बोल दिया। इससे पहले, हूती विद्रोहियों ने दावा किया था कि उन्होंने लाल सागर से गुजर रहे सऊदी तेल टैंकरों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया, जिसमें कम से कम एक विशाल तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गया। हूतियों के अनुसार, यह कार्रवाई 20 जुलाई को घोषित उनकी उस समुद्री नाकेबंदी के तहत की गई है, जो सना हवाई अड्डे पर हुए हमले के जवाब में लागू की गई थी। उल्लेखनीय है कि सना एयरपोर्ट पर हुए हमले की जिम्मेदारी सऊदी समर्थित सरकार ने ली थी। वर्ष 2022 से सऊदी अरब और यमन के बीच चली आ रही अनौपचारिक युद्धविराम (शांति समझौता) अब पूरी तरह टूटती नजर आ रही है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल निष्कर्षण और शोधन कंपनी अरामको पर सीधे हमले और लाल सागर जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर टैंकरों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सऊदी अरब और यमन के बीच यह सैन्य टकराव तुरंत नहीं रुका, तो पहले से ही अस्थिर चल रहा मिडिल ईस्ट एक और बड़े और विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस सकता है।